वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोना और चांदी में बड़ी गिरावट: अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार का हाल
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोना और चांदी में बड़ी गिरावट: अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार का हाल
वैश्विक अनिश्चितताओं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों को लेकर बनी चिंताओं के कारण इस सप्ताह सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। दोनों कीमती धातुएं भारी बिकवाली के दबाव में नजर आईं।
सोने और चांदी के साप्ताहिक प्रदर्शन के मुख्य बिंदु:
सोने की कीमतों में गिरावट: इस सप्ताह सोने की कीमतों में करीब 3.5 प्रतिशत की गिरावट आई है, जो जून के बाद इसका सबसे खराब साप्ताहिक प्रदर्शन माना जा रहा है।
चांदी में बड़ी बिकवाली: चांदी में और भी अधिक कमजोरी देखने को मिली और इसकी कीमतों में साप्ताहिक आधार पर 7.8 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह नवंबर 2025 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई।
घरेलू बाजार (MCX) का हाल:
सोना: मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दिसंबर वायदा सोने का भाव गिरकर 1,42,150 रुपए प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया। कारोबार के दौरान यह 1,42,079 रुपए प्रति 10 ग्राम तक फिसल गया था, जो पिछले सत्र की तुलना में लगभग 1,230 रुपए (0.86%) की गिरावट दर्शाता है।
चांदी: दिसंबर वायदा चांदी का भाव गिरकर लगभग 1,95,408 रुपए प्रति किलोग्राम पर आ गया, जिसमें 4,191 रुपए यानी 2.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। लगातार बिकवाली के चलते चांदी का भाव अब 2 लाख रुपए प्रति किलोग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार (Comex) की स्थिति:
कॉमेक्स गोल्ड: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स गोल्ड 1.24 प्रतिशत गिरकर 4,010 डॉलर प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रहा है, जबकि सत्र के दौरान यह 3,989.10 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गया था, जो 20 जुलाई के बाद का सबसे निचला स्तर है।
कॉमेक्स सिल्वर: कॉमेक्स पर चांदी करीब 1.9 प्रतिशत की गिरावट के साथ 53.96 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई है।
बाजार में इस मंदी की मुख्य वजहें क्या हैं?
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी: हूती हमलों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड उछलकर 116.7 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। ऊंचे तेल दामों से वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने की आशंका है।
फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीतियां: चूंकि सोना किसी प्रकार का ब्याज नहीं देता, इसलिए ऊंची ब्याज दरों के माहौल में इसका आकर्षण कम हो जाता है। विश्लेषकों के अनुसार, दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावना अभी भी 80 प्रतिशत से अधिक बनी हुई है, जिससे निवेशक नई खरीदारी से बच रहे हैं।
मजबूत डॉलर और बॉन्ड यील्ड: मजबूत अमेरिकी डॉलर और ऊंची बॉन्ड यील्ड ने भी बुलियन मार्केट की चमक फीकी करने में अहम भूमिका निभाई है।
आगे किन आंकड़ों पर रहेगी नजर?
विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में बाजार की चाल मुख्य रूप से निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करेगी:
अमेरिकी पर्सनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर (PCE) मुद्रास्फीति के आंकड़े (जो फेडरल रिजर्व के लिए महंगाई का प्रमुख संकेतक हैं)।
यूरोपीय सेंट्रल बैंक की आगामी बैठक और चीन के आर्थिक आंकड़े।
वैश्विक ऊर्जा बाजार और भू-राजनीतिक घटनाक्रम।
यदि महंगाई ऊंची बनी रहती है और केंद्रीय बैंकों का रुख सख्त रहता है, तो कीमती धातुओं पर अल्पकालिक दबाव बना रह सकता है, हालांकि किसी बड़े भू-राजनीतिक जोखिम की स्थिति में सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में सोने को फिर से समर्थन मिल सकता है।

