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दिल्ली मेट्रो में ‘विवादित पोस्टर’ पर एफआईआर और जामिया में ‘आजाद कश्मीर’ के नारों पर खड़ा हुआ सियासी बवाल

दिल्ली मेट्रो में ‘विवादित पोस्टर’ पर एफआईआर और जामिया में ‘आजाद कश्मीर’ के नारों पर खड़ा हुआ सियासी बवाल

​राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दो अलग-अलग घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन को अलर्ट पर डाल दिया है। एक तरफ दिल्ली मेट्रो की एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन में सरकार विरोधी पोस्टरों के मिलने पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है, तो दूसरी तरफ जामिया मिलिया इस्लामिया कैंपस की दीवारों पर ‘आजाद कश्मीर’ लिखे नारों के सामने आने पर विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्र संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है।

​1. दिल्ली मेट्रो की एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन में मिले विवादित पोस्टर, जांच में जुटी स्पेशल सेल

​दिल्ली मेट्रो की प्रतिष्ठित एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन की एक ट्रेन के अंदर सरकार के कामकाज और पिछले कुछ वर्षों में देश में आए बदलावों पर सवाल उठाने वाले ब्लैक-एंड-व्हाइट पोस्टर चिपके मिले।

​कानूनी कार्रवाई: पुलिस ने इन पोस्टरों को जब्त कर अज्ञात लोगों के खिलाफ ‘दिल्ली प्रिवेंशन ऑफ डिफेसमेंट ऑफ Public Property एक्ट, 2007’ और ‘मेट्रो रेलवे (ऑपरेशंस एंड मेंटेनेंस) एक्ट, 2002’ की धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज की है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल भी इस मामले की गहराई से जांच कर रही है।

​QR कोड का इस्तेमाल: पोस्टरों पर एक क्यूआर (QR) कोड भी छपा था, जिसके जरिए लोगों को एक ऑनलाइन ग्रुप से जुड़ने के लिए कहा गया था।

​मेट्रो संचालन और सुरक्षा का संदर्भ: गौरतलब है कि इससे पहले भी सुरक्षा कारणों और विभिन्न प्रदर्शनों (जैसे सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन और इंडी गठबंधन के मार्च) के चलते सुरक्षा के तहत कई बार मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद करने पड़े थे, हालांकि ट्रेन सेवाएं निर्धारित समय सारणी के अनुसार संचालित की जाती रही हैं।

​2. जामिया की दीवारों पर ‘आजाद कश्मीर’ के नारे; जेकेएसए (JKSA) ने की जांच की मांग

​जामिया मिलिया इस्लामिया में स्टूडेंट यूनियन की बहाली और कैंपस चुनाव कराने की मांग को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच कैंपस की दीवारों पर ‘आजाद कश्मीर’ लिखे नारे सामने आए हैं, जिसकी जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) ने पुरजोर निंदा की है।

​”जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा”

JKSA के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएहामी ने बयान जारी कर कहा कि “छात्र आंदोलन को भटकाने और बदनाम करने के लिए यह साजिश रची गई है। हम भारत के विभाजन की वकालत करने वाले किसी भी नारे का समर्थन नहीं करते। जिम्मेदार लोगों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।”

​छात्र संगठन का रुख और मुख्य बिंदु:

​लोकतांत्रिक मांगों को दबाने की कोशिश: एसोसिएशन का कहना है कि छात्र केवल निर्वाचित छात्र संघ और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे हैं। ऐसे भड़काऊ नारों का इस आंदोलन में कोई स्थान नहीं है।

​बाहरी तत्वों पर संदेह: संगठन ने कैंपस में बिना अनुमति बाहरी लोगों के प्रवेश पर चिंता जताते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन और दिल्ली पुलिस से निष्पक्ष जांच की अपील की है।

​राजनीतिक बयानबाजी पर ऐतराज: जेकेएसए ने कहा कि केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह जैसे नेताओं द्वारा इस घटना के आधार पर पूरे छात्र समुदाय को बदनाम करना और उनकी जायज मांगों को खारिज करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

 

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