अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट में सियांग मेगा डैम के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन हिंसक: पुलिस स्टेशन, NHPC दफ्तर और नेताओं के आवासों में आगजनी-तोड़फोड़
अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट में सियांग मेगा डैम के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन हिंसक: पुलिस स्टेशन, NHPC दफ्तर और नेताओं के आवासों में आगजनी-तोड़फोड़
अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट में शुक्रवार रात प्रस्तावित ‘अपर सियांग मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट’ (SUMP) के खिलाफ हो रहा विरोध-प्रदर्शन उग्र होकर हिंसक रूप ले चुका है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है, जबकि क्षेत्र में भारी तनाव बना हुआ है।
हिंसा और आगजनी की मुख्य घटनाएं:
पुलिस स्टेशन और NHPC दफ्तर पर हमला: प्रदर्शनकारियों ने पासीघाट पुलिस स्टेशन पर हमला बोल दिया और NHPC के स्थानीय कार्यालय में आगजनी की। उपद्रवियों ने पुलिस की कम से कम 7 गाड़ियों को भी आग के हवाले कर दिया।
नेताओं के आवासों में तोड़फोड़: मिली जानकारी के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय विधायकों (निनोंग एरिंग और ओनी पान्यांग) तथा राज्य बीजेपी अध्यक्ष कालिंग मोयोंग के घरों और रिहायशी परिसरों में जमकर तोड़फोड़ की।
गिरफ्तारी के खिलाफ भड़का गुस्सा: यह पूरा बवाल तब शुरू हुआ जब ‘जेन जेड’ (Gen Z) युवाओं समेत बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी, मेगा डैम के विरोध के दौरान हिरासत में लिए गए 10 लोगों की तत्काल रिहाई की मांग कर रहे थे। गेकू (Geku) में ‘बंद’ का समर्थन कर रहे लोगों पर पुलिस द्वारा आंसू गैस के गोले छोड़े जाने (जिसमें चार महिलाओं के घायल होने की खबर है) के बाद गुस्सा और भड़क गया।
क्या है ‘अपर सियांग मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट’ और इसका विरोध क्यों हो रहा है?
परियोजना का दायरा: ‘अपर सियांग मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट’ (SUMP) लगभग 10,000 से 11,000 मेगावाट की क्षमता वाली देश की सबसे बड़ी प्रस्तावित जलविद्युत और जल-भंडारण परियोजनाओं में से एक है। इसे नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (NHPC) और अरुणाचल प्रदेश सरकार द्वारा आगे बढ़ाया जा रहा है।
रणनीतिक महत्व बनाम स्थानीय चिंताएं: इस बांध को तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी पर चीन द्वारा बनाए जा रहे विशाल बांध के रणनीतिक जवाब के रूप में देखा जा रहा है (यही नदी भारत में प्रवेश करने पर ‘सियांग’ और आगे चलकर ‘ब्रह्मपुत्र’ बनती है)।
स्थानीय संगठनों का विरोध: ‘आदि बाने केबांग-यूनाइटेड’, ‘SUMP-अफेक्टेड यूथ एसोसिएशन’ और ‘आदि गैलो वेलफेयर सोसाइटी’ जैसे कई स्थानीय संगठन इस परियोजना को पूरी तरह रद्द करने और इलाके से सशस्त्र बलों को हटाने की मांग कर रहे हैं, जिसके चलते पिछले कुछ हफ्तों से इस क्षेत्र में लगातार विरोध प्रदर्शन जारी हैं।

