भारत-चीन सीमा पर शांति जरूरी, LAC के मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत जारी: विदेश मंत्रालय
भारत-चीन सीमा पर शांति जरूरी, LAC के मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत जारी: विदेश मंत्रालय
भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए बेहद जरूरी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर लंबित मुद्दों को सुलझाने और गलतफहमी से बचने के लिए भारत और चीन मौजूदा राजनयिक तथा सैन्य तंत्रों के माध्यम से बातचीत जारी रखे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि जब चीनी सेना स्थापित गश्त के तौर-तरीकों से अलग हटती है, तो सीमा क्षेत्रों की स्थिति प्रभावित होती है। दोनों देश सीमा प्रबंधन को बेहतर बनाने और LAC को लेकर अपनी समझ मजबूत करने के तरीकों पर भी चर्चा कर रहे हैं।
LAC पर गलतफहमी और टकराव रोकने पर जोर
रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों का समाधान द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई है कि सीमा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए उपयुक्त क्षेत्रों में LAC की समझ को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की जाएगी।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने जोर देकर कहा कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के व्यापक संबंधों के विकास के लिए आवश्यक है।
जयशंकर ने अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से की मुलाकात
विदेश मंत्रालय ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अजरबैजान यात्रा को लेकर भी जानकारी दी। जायसवाल के मुताबिक, जयशंकर ने शुक्रवार को बाकू में अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।
विदेश मंत्री ने राष्ट्रपति अलीयेव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत की राष्ट्रपति की ओर से शुभकामनाएं भी दीं। इसके बाद जयशंकर ने अजरबैजान के विदेश मंत्री के साथ विस्तृत बातचीत की, जिसे विदेश मंत्रालय ने सकारात्मक बताया।
भारत-अजरबैजान संबंधों को मजबूत करने पर सहमति
रणधीर जायसवाल ने बताया कि दोनों देशों ने राजनीतिक परामर्श को और गहरा करने तथा व्यापारिक दौरों सहित विभिन्न क्षेत्रों में आपसी यात्राओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर सहमति जताई।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव के बीच बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन से इतर हुई मुलाकात के बाद जयशंकर का यह दौरा दोनों देशों के बीच संवाद को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
आतंकवाद और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा
जयशंकर की अजरबैजान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने सुरक्षा से जुड़े मुद्दों, आतंकवाद और साझा खतरों पर भी विचार-विमर्श किया।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और अजरबैजान इस बात पर सहमत हुए कि दोनों देशों के नागरिकों की शांति, समृद्धि और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आपसी सहयोग और समन्वय को मजबूत करना जरूरी है। दोनों पक्षों ने साझा चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम करने पर भी जोर दिया।

