आरटीआई से हुआ बड़ा खुलासा: चुनाव आयोग के भीतर सीनियर अधिकारियों के कामकाज और मतदाता सूची IT सिस्टम पर उपजा विवाद
आरटीआई से हुआ बड़ा खुलासा: चुनाव आयोग के भीतर सीनियर अधिकारियों के कामकाज और मतदाता सूची IT सिस्टम पर उपजा विवाद
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के भीतर सीनियर अधिकारियों के बीच प्रशासनिक नियंत्रण और कार्य आवंटन को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत सामने आई जानकारी के अनुसार, दो चुनाव आयुक्तों—डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी—ने 29 जुलाई 2026 को कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन को पत्र लिखकर आयोग के वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग के आचरण और एकतरफा फैसलों पर गंभीर आपत्ति जताई थी।
क्या है पूरा विवाद?
अक्टूबर 2026 में आरटीआई के जरिए सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, यह विवाद उच्च अधिकारियों के विभागों और जिम्मेदारियों के पुनर्गठन से शुरू हुआ:
एकतरफा आदेश का आरोप: दोनों चुनाव आयुक्तों ने आरोप लगाया कि मनीष गर्ग ने आयोग या अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बिना किसी पूर्व चर्चा या सहमति के अधिकारियों के काम के बंटवारे में फेरबदल का एकतरफा आदेश जारी कर दिया था।
डेटा और सुरक्षा पर चिंता: आयुक्तों की मुख्य चिंता यह थी कि इस अचानक फेरबदल की वजह से मतदाता सूची (Voter List) के संवेदनशील आईटी सिस्टम की निगरानी, डेटा के केंद्रीकरण, सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर बड़े जोखिम पैदा हो सकते थे।
फाइल देने से इनकार: डॉ. विवेक जोशी ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने प्रशासन प्रभाग से संबंधित फाइल मांगी, तो उन्हें फाइल देखने तक से मना कर दिया गया। वहीं, डॉ. सुखबीर सिंह संधू ने इसे प्रशासनिक नियमों का सीधा उल्लंघन करार दिया।
कैबिनेट सचिव ने हस्तक्षेप से किया इनकार
दोनों चुनाव आयुक्तों ने व्यक्तिगत क्षमता में कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन को शिकायत भेजी थी। हालांकि, कैबिनेट सचिवालय और केंद्र सरकार ने इस मामले में सीधे हस्तक्षेप करने से मना कर दिया:
संवैधानिक स्वायत्तता की रक्षा: कैबिनेट सचिवालय का मानना था कि यदि सरकार इसमें सीधे हस्तक्षेप करती है, तो इसे निर्वाचन आयोग की संवैधानिक स्वायत्तता (Institutional Autonomy) में कार्यपालिका का हस्तक्षेप माना जाएगा।
मामला सीईसी को ट्रांसफर: 5 अगस्त 2026 को कैबिनेट सचिव ने इन पत्रों की प्राप्ति स्वीकार की और मामला आंतरिक रूप से सुलझाने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कार्यालय को ट्रांसफर कर दिया।
अब चुनाव आयोग ही करेगा अंतिम फैसला
आरटीआई दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि मनीष गर्ग की नियुक्ति भले ही कैबिनेट समिति द्वारा की गई थी, लेकिन वर्तमान में वे चुनाव आयोग के अधिकारी हैं। इसलिए उनके कामकाज, आचरण और उनके खिलाफ किसी भी अनुशासनात्मक कार्रवाई का अंतिम निर्णय केवल भारत निर्वाचन आयोग ही ले सकता है।

