टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामला: मुंबई क्राइम ब्रांच का बड़ा खुलासा, अभिनेता ही थे मुख्य निशाना; केस में जोड़ी गई ‘ऑर्गनाइज्ड क्राइम’ की सख्त धारा
टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामला: मुंबई क्राइम ब्रांच का बड़ा खुलासा, अभिनेता ही थे मुख्य निशाना; केस में जोड़ी गई ‘ऑर्गनाइज्ड क्राइम’ की सख्त धारा
मुंबई:
बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ (Tiger Shroff) पर हाल ही में हुए जानलेवा हमले और फायरिंग के मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने पूछताछ में यह स्वीकार कर लिया है कि इस हमले का मुख्य निशाना टाइगर श्रॉफ ही थे। इससे पहले शुरुआती जांच में यह बात सामने आ रही थी कि आरोपियों के निशाने पर अमिताभ बच्चन, सलमान खान और आमिर खान जैसे अन्य दिग्गज सितारे भी हो सकते हैं, लेकिन अब तस्वीर साफ हो गई है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंबई क्राइम ब्रांच ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 (संगठित अपराध – Organized Crime) भी जोड़ दी है, जिसके तहत मृत्युदंड (फांसी) तक का प्रावधान है।
घर, जिम और फुटबॉल ग्राउंड की कर रहे थे लंबी रेकी
क्राइम ब्रांच की पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपी काफी दिनों से टाइगर श्रॉफ की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे:
रेकी: आरोपी अभिनेता के घर, उनके रेगुलर जिम और फुटबॉल ग्राउंड की लगातार रेकी (निगरानी) कर रहे थे।
शक से बचने की चाल: पुलिस को गुमराह करने और किसी भी प्रकार के शक से बचने के लिए आरोपियों ने ऐसा ढोंग रचा मानो वे आम सैलानी हों और सिर्फ मुंबई घूमने आए हों। इस दौरान वे शाहरुख खान, अक्षय कुमार, सलमान खान और अमिताभ बच्चन जैसे सितारों के घरों के आसपास भी गए ताकि पुलिस का ध्यान भटकाया जा सके।
ऑटो चालकों को दिया धोखा: आरोपियों ने सफर के दौरान ऑटो-रिक्शा चालकों को भी इस तरह गुमराह किया कि किसी को यह भनक तक न लगे कि वे टाइगर श्रॉफ की टोह ले रहे हैं।
होटल के कमरे में हुई थी मिसफायरिंग की घटना
जांच में यह भी सामने आया है कि इस घातक हमले को अंजाम देने से पहले आरोपियों ने पूरी तैयारी की थी:
मुंबई के पास किसी सुनसान जगह पर इन्होंने हथियार चलाने की प्रैक्टिस (शूटिंग प्रैक्टिस) की थी।
इसके अलावा, अंधेरी स्थित एक होटल के कमरे में हथियार चेक करते समय गलती से बंदूक से गोली चल (मिसफायर) गई थी।
गौरतलब है कि टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग के दौरान भी सीसीटीवी फुटेज में एक बदमाश की बंदूक फंसते हुए नजर आई थी, जो इस बात की पुष्टि करती है कि वे पेशेवर तरीके से पूरी तैयारी के साथ नहीं आए थे या हथियारों के रख-रखाव में चूक कर रहे थे।
केस में जुड़ी BNS की धारा 111: कितनी खतरनाक है यह धारा?
इस मामले में हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के साथ-साथ अब BNS की धारा 111 का जुड़ना जांच का सबसे बड़ा मोड़ माना जा रहा है। यह धारा ‘संगठित अपराध सिंडिकेट’ से जुड़ी गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए बनाई गई है, जिसके दायरे में एक्सटॉर्शन, कॉन्ट्रैक्ट किलिंग और आपराधिक षड्यंत्र आते हैं।
कड़ी सजा के प्रावधान:
यदि संगठित अपराध के दौरान किसी की मौत होती है, तो इस धारा के तहत फांसी (मौत की सजा) या उम्रकैद की सजा मिल सकती है, साथ ही कम से कम 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लग सकता है।
साजिश रचने, उकसाने या इसमें किसी भी तरह से शामिल होने पर 5 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा और कम से कम 5 लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है।
अपराधियों को पनाह देने वालों पर भी शिकंजा: जो लोग जानबूझकर ऐसे अपराधियों को शरण देते हैं, छिपाते हैं या अवैध संपत्ति अपने पास रखते हैं, उन्हें भी इसी कड़ी धारा के तहत जेल की हवा खानी होगी।
मुंबई क्राइम ब्रांच इस मामले के हर एक पहलू और इसके पीछे के मास्टरमाइंड तक पहुंचने के लिए गहराई से जांच कर रही है।

