Thursday, October 22, 2026
उत्तराखंड

उत्तराखंड में 108 एंबुलेंस सेवा को लेकर बड़ा फैसला, 3 लाख किमी चल चुकीं करीब 50 एंबुलेंस बदली जाएंगी; मॉनिटरिंग के लिए बनेगी टीम

उत्तराखंड में 108 एंबुलेंस सेवा को लेकर बड़ा फैसला, 3 लाख किमी चल चुकीं करीब 50 एंबुलेंस बदली जाएंगी; मॉनिटरिंग के लिए बनेगी टीम

उत्तराखंड में 108 एंबुलेंस सेवा को अधिक प्रभावी और बेहतर बनाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने तीन लाख किलोमीटर से अधिक चल चुकीं करीब 50 एंबुलेंस को तत्काल बदलने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, पुरानी और बार-बार खराब होने वाली एंबुलेंस को बदलने की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा है, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को समय पर चिकित्सा सहायता मिल सके।

गुरुवार को सचिवालय में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में 108 एंबुलेंस सेवा से संबंधित व्यय वित्त समिति की बैठक हुई। बैठक में एंबुलेंस सेवा की गुणवत्ता, वाहनों की स्थिति, निगरानी व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं में सुधार को लेकर कई अहम निर्देश दिए गए।

पुरानी एंबुलेंस को तत्काल बदलने के निर्देश

मुख्य सचिव ने कहा कि 108 एंबुलेंस सेवा सीधे लोगों के जीवन से जुड़ी है। इसलिए वाहनों को निर्धारित मानकों के अनुरूप बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने पुरानी और निर्धारित अवधि पूरी कर चुकी एंबुलेंस को तत्काल बदलने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि एंबुलेंस को चरणबद्ध तरीके से बदला जा सकता है, लेकिन इस काम में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। खास तौर पर तीन लाख किलोमीटर से अधिक चल चुकी करीब 50 एंबुलेंस को प्राथमिकता के आधार पर बदलने को कहा गया है।

एंबुलेंस की निगरानी के लिए बनेगी विशेष टीम

108 सेवा की कार्यप्रणाली पर नजर रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग में एक विशेष निगरानी व्यवस्था तैयार की जाएगी। मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत एक समर्पित टीम गठित करने के निर्देश दिए हैं।

यह टीम एंबुलेंस सेवा से जुड़े विभिन्न पहलुओं की नियमित निगरानी और विश्लेषण करेगी। इसके तहत साप्ताहिक और मासिक आधार पर समीक्षा की जाएगी, ताकि किसी भी तरह की कमी या असामान्य स्थिति सामने आने पर तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई की जा सके।

सिर्फ औसत रिस्पांस टाइम से नहीं होगा आकलन

मुख्य सचिव ने एंबुलेंस के पहुंचने के समय की समीक्षा को लेकर भी अहम निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सेवा की गुणवत्ता का आकलन केवल औसत रिस्पांस टाइम के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि हर मामले में एंबुलेंस को मौके तक पहुंचने में लगे वास्तविक समय का विश्लेषण किया जाए।

इससे उन मामलों की पहचान हो सकेगी, जिनमें एंबुलेंस पहुंचने में अधिक समय लगा। इसके बाद देरी के कारणों का पता लगाकर जरूरी सुधार किए जा सकेंगे।

जीवनरक्षक उपकरणों की हर महीने होगी जांच

एंबुलेंस में उपलब्ध जीवनरक्षक उपकरणों की नियमित जांच सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रत्येक महीने इन उपकरणों की अनिवार्य जांच की जाए।

इसके लिए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी, ताकि आपातकाल के दौरान उपकरणों की कमी या खराबी के कारण मरीजों को परेशानी न हो।

एंबुलेंस सेवा की निगरानी के लिए बनेगा मोबाइल ऐप

108 एंबुलेंस सेवा को आधुनिक और सुगम बनाने के लिए एक मोबाइल ऐप भी जल्द तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके माध्यम से मरीज की स्थिति और लोकेशन के आधार पर एंबुलेंस की आवाजाही तथा सेवा की निगरानी की जा सकेगी।

मुख्य सचिव ने सरकारी एंबुलेंस को भी जरूरी सुविधाओं से लैस करके इस व्यवस्था में शामिल करने पर जोर दिया। इससे उपलब्ध एंबुलेंस की संख्या बढ़ाने और आपातकालीन सेवाओं की क्षमता मजबूत करने में मदद मिलेगी।

प्रदेश में चल रही हैं 272 एंबुलेंस

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में उत्तराखंड में 108 सेवा के तहत 272 एंबुलेंस संचालित हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग की ओर से 250 से अधिक सरकारी एंबुलेंस भी चलाई जा रही हैं।

सरकार की इस पहल का उद्देश्य एंबुलेंस सेवा की निगरानी को मजबूत करना, पुराने वाहनों को बदलना और आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों तक समय पर चिकित्सा सहायता पहुंचाना है। अब इन निर्देशों के क्रियान्वयन और नई व्यवस्था लागू होने पर नजर रहेगी।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *