‘रेजीम चेंज’ की साजिशों पर भाजपा का तीखा हमला: सुधांशु त्रिवेदी बोले— “140 करोड़ भारतीयों के संकल्प से टकराकर चकनाचूर हो जाएगा विदेशी ताकतों का सपना”
‘रेजीम चेंज’ की साजिशों पर भाजपा का तीखा हमला: सुधांशु त्रिवेदी बोले— “140 करोड़ भारतीयों के संकल्प से टकराकर चकनाचूर हो जाएगा विदेशी ताकतों का सपना”
नई दिल्ली:
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुधवार को विपक्ष पर देश में ‘रेजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन के खतरनाक और भ्रामक नैरेटिव को बढ़ावा देने का गंभीर आरोप लगाया है। एक संवाददाता सम्मेलन में भाजपा ने दावा किया कि इस पूरे अभियान के पीछे कुछ अज्ञात और संदिग्ध विदेशी ताकतें सक्रिय हैं, जो भारत में हिंसा भड़काने और देश की प्रगति को बाधित करने की कोशिश कर रही हैं।
भाजपा की यह तीखी प्रतिक्रिया शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और अन्य विपक्षी नेताओं द्वारा ‘रेजीम चेंज’ के मुद्दे को उठाने और इसे अपरिहार्य बताने के बयानों के बाद आई है, जिससे देश की राजनीति में भूचाल आ गया है।
”देश के भीतर और बाहर ताकतों का गठजोड़”
दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने विपक्षी एजेंडे पर प्रहार करते हुए कहा:
वैश्विक स्थिति बनाम साजिश: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक मंच पर लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है, लेकिन देश के भीतर और बाहर मौजूद कुछ ताकतें इस विकास से खुश नहीं हैं। इनके बीच एक स्पष्ट गठजोड़ दिखाई दे रहा है।
यूरोप के प्रदर्शनों का संदर्भ: त्रिवेदी ने यूरोप में हो रहे हालिया प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि वहां के घटनाक्रमों से भारतीय नागरिकों के सामने यह तस्वीर और साफ हो रही है कि किस तरह प्रायोजित आंदोलनों के जरिए अस्थिरता फैलाई जाती है।
विजयादशमी संबोधन का जिक्र: उन्होंने प्रधानमंत्री के विजयादशमी संबोधन का उल्लेख करते हुए याद दिलाया कि कैसे पीएम ने भ्रष्टाचार, सामाजिक विभाजन और भारतीय संस्कृति व धर्म के विरोध के जरिए देश को कमजोर करने वाली ताकतों के प्रति राष्ट्र को आगाह किया था।
रामायण के दृष्टांत से आंदोलनों के पैटर्न पर प्रहार
सुधांशु त्रिवेदी ने आंदोलनों की प्रकृति और उनकी मंशा को समझाने के लिए रामायण का सुंदर उदाहरण दिया:
रावण के दस सिर की तुलना: उन्होंने कहा कि जिस तरह रावण का एक सिर काटने पर दूसरा सामने आ जाता था, ठीक उसी तरह इन आंदोलनों में एक मांग पूरी होते ही तुरंत दूसरी मांग खड़ी कर दी जाती है। इन आंदोलनों में बार-बार इस्तेमाल होने वाले शब्दों और नारों के पीछे के मूल एजेंडे को समझना बेहद जरूरी है।
साधु वेश में रावण: रावण द्वारा साधु का वेश धरकर सीता के अपहरण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ये ताकतें अलग-अलग छद्म रूपों में सामने आकर अपने वास्तविक और खतरनाक इरादों को छिपाती हैं। इनका मकसद मांगों का समाधान नहीं, बल्कि हिंसक संघर्ष के जरिए चुनी हुई सरकार को गिराना है।
उद्धव ठाकरे, संजय राउत और कांग्रेस से तीखे सवाल
भाजपा प्रवक्ता ने शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस के शीर्ष नेताओं पर निशाना साधते हुए कई तीखे सवाल दागे:
बालासाहेब की विरासत पर सवाल: उन्होंने कहा कि स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे की विरासत का दावा करने वाले नेताओं को जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे उन ताकतों के साथ क्यों खड़े हैं, जो धर्म और संस्कृति को कमजोर करना चाहती हैं।
विदेश यात्राओं के बाद भविष्यवाणियां: त्रिवेदी ने विदेश दौरों के बाद आने वाले राजनीतिक बयानों पर तंज कसते हुए कहा कि कभी विदेश से लौटकर ‘हाइड्रोजन बम’ फोड़ने की बात कही जाती है, तो कभी ‘सुनामी’ आने की भविष्यवाणी की जाती है। अब संजय राउत के बयानों के संदर्भ में भी ऐसे कथित घटनाक्रमों के पीछे संदिग्ध विदेशी संपर्कों की भूमिका दिखती है।
”कांच की तरह टूटेगा रेजीम चेंज का सपना”
अपनी बात का समापन करते हुए भाजपा सांसद ने हुंकार भरी कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को देश की जनता का अटूट विश्वास प्राप्त है। उन्होंने कहा:
”रेजीम चेंज का सपना 140 करोड़ देशभक्त भारतीयों के दृढ़ संकल्प से टकराकर चकनाचूर हो जाएगा, ठीक उसी तरह जैसे पत्थर से टकराकर कांच टूट जाता है।”
हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भाजपा प्रवक्ता की ओर से विदेशी ताकतों की कथित संलिप्तता के दावों के समर्थन में कोई प्रत्यक्ष दस्तावेज या सबूत सार्वजनिक नहीं किए गए, लेकिन इस बयानबाज़ी ने देश की कूटनीतिक और राजनीतिक सियासत को पूरी तरह गर्मा दिया है।

