बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का बड़ा ऐलान: खतरों की परवाह किए बिना स्वदेश लौटने की जताई इच्छा, भारत सरकार का जताया आभार
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का बड़ा ऐलान: खतरों की परवाह किए बिना स्वदेश लौटने की जताई इच्छा, भारत सरकार का जताया आभार
वाशिंगटन / नई दिल्ली:
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने वॉशिंगटन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को वर्चुअल रूप से संबोधित करते हुए अपने देश वापस लौटने की प्रबल इच्छा जताई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वापसी से जुड़े गंभीर खतरे, गिरफ्तारी या यातना की आशंका उन्हें अपने देश लौटने से नहीं रोक सकती।
”वापसी कितनी भी जोखिम भरी क्यों न हो, मुझे वापस जाना होगा”
अगस्त 2024 में तख्तापलट के बाद बांग्लादेश छोड़ने और वर्तमान में भारत में शरण लिए हुए शेख हसीना ने कहा कि जब उनके समर्थक और आम बांग्लादेशी नागरिक भारी मुश्किलों और संकट का सामना कर रहे हैं, तब वह देश से दूर नहीं रह सकतीं।
गिरफ्तारी और जान के खतरे की परवाह नहीं: हसीना ने कहा, “मुझे पता है कि बांग्लादेश लौटने पर मुझे जेल जाना पड़ सकता है, यातना का सामना करना पड़ सकता है या मेरी जान को भी खतरा हो सकता है। लेकिन वापसी कितनी भी जोखिम भरी क्यों न हो, मुझे इसकी कोई परवाह नहीं है। एक राजनीतिक नेता होने के नाते मेरे समर्थकों के साथ खड़ा होना मेरी जिम्मेदारी है।”
ऐतिहासिक संदर्भ: उन्होंने अपने जीवन के पुराने संघर्षों को याद करते हुए बताया कि 1981 में भी वह परिवार की त्रासदियों और खतरों के बावजूद विदेश से स्वदेश लौटी थीं। इसके अलावा उन्होंने 2007 के राजनीतिक आपातकाल के दौरान भी तमाम आपराधिक आरोपों के बावजूद वापस लौटने का फैसला किया था।
भारत सरकार और जनता का जताया आभार
भारत में रह रहीं पूर्व प्रधानमंत्री ने इस कठिन समय में शरण और सहयोग प्रदान करने के लिए भारत सरकार और भारतीय जनता का हृदय से धन्यवाद किया। उन्होंने कहा, “मैं भारत सरकार, यहां के लोगों और सभी दलों की बेहद आभारी हूँ। उन्होंने मुझे और मेरे परिवार को उसी तरह अपनाया, जैसे 1975 में अपनाया था।” (बता दें कि 1975 में उनके पिता शेख मुजीबुर रहमान समेत परिवार के कई सदस्यों की हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद उन्हें भारत में शरण मिली थी।)
अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील
अमेरिका को संदेश देते हुए शेख हसीना ने कहा कि वॉशिंगटन को किसी एक व्यक्ति या दल का समर्थन करने के बजाय बांग्लादेश में लोकतांत्रिक संस्थाओं, बहुदलीय राजनीति और निष्पक्ष चुनावों का समर्थन करना चाहिए।
”मेरा संदेश अमेरिका के लिए यह है कि वह शेख हसीना या किसी दूसरे नेता को न चुने, बल्कि लोकतंत्र को चुने।”
उन्होंने बांग्लादेश में स्वतंत्र न्यायपालिका, अभिव्यक्ति की आजादी, राजनीतिक दलों के गठन की स्वतंत्रता, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कानून के उचित पालन की वकालत की। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से बाहर करने से देश में विभाजन और बढ़ेगा।
निष्पक्ष जांच और मेल-मिलाप की बात
शेख हसीना ने यह भी स्वीकार किया कि उनकी सरकार के कामकाज और 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई घटनाओं को लेकर कई गंभीर और कठिन सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ या किसी भी अन्य व्यक्ति के खिलाफ लगे आरोपों की जांच एक पारदर्शी और निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए।
उन्होंने अंत में कहा कि बांग्लादेश का भविष्य बदले की राजनीति या भावना पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय मेल-मिलाप (National Reconciliation) और समावेशी राजनीतिक प्रक्रिया के आधार पर बनना चाहिए। उनकी वापसी की कोई निश्चित तारीख अभी तय नहीं की गई है, और उनके बेटे सजीब वाजेद जॉय के अनुसार सही समय आने पर इसकी घोषणा की जाएगी।

