Tuesday, October 20, 2026
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विजयादशमी 2026: जानिए आयुध पूजा का शुभ मुहूर्त, स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि और इसका धार्मिक महत्व

विजयादशमी 2026: जानिए आयुध पूजा का शुभ मुहूर्त, स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि और इसका धार्मिक महत्व

​नई दिल्ली:

​विजयादशमी (दशहरा) के पावन पर्व पर शस्त्रों, औजारों और वाहनों की पूजा का विशेष विधान है, जिसे ‘आयुध पूजा’ (Astra-Shastra & Ayudha Puja) कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन कार्यक्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों, मशीनों, वाहनों और व्यावसायिक साजो-सामान की पूजा करने से कार्यक्षेत्र में उन्नति होती है, दुर्घटनाओं से बचाव होता है और व्यापार में तरक्की के नए योग बनते हैं।

​आयुध पूजा 2026: शुभ मुहूर्त

​पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 20 अक्टूबर 2026 को आयुध पूजा की जा रही है। अस्त्र-शस्त्रों और वाहनों की पूजा के लिए निम्नलिखित मुहूर्त सबसे उत्तम माने गए हैं:

​विजय मुहूर्त: दोपहर 1:59 मिनट से दोपहर 2:45 मिनट तक।

​अपराह्न पूजा मुहूर्त: दोपहर 1:14 मिनट से दोपहर 3:30 मिनट तक।

​आयुध पूजा विधि: स्टेप-बाय-स्टेप

​सफाई और शुद्धि: पूजा शुरू करने से पहले अपने सभी शस्त्रों, औजारों, गाड़ियों, लैपटॉप या व्यावसायिक मशीनों की अच्छी तरह से साफ-सफाई कर लें।

​पवित्रिकरण: पूजन स्थल और अपने सभी उपकरणों पर थोड़ा सा गंगाजल छिड़ककर उन्हें पवित्र कर लें।

​तिलक लगाएं: सभी औजारों, शस्त्रों और वाहनों पर हल्दी, कुमकुम (रोली) और चंदन से तिलक लगाएं।

​स्वास्तिक बनाएं: वाहनों और मुख्य उपकरणों पर कुमकुम से शुभ ‘स्वास्तिक’ का चिह्न बनाएं।

​पुष्प अर्पण: उपकरणों और वाहनों को गेंदे के फूलों की माला पहनाएं और पुष्प अर्पित करें।

​रक्षासूत्र बांधें: सभी औजारों और गाड़ियों के स्टीयरिंग, हैंडल या मुख्य भाग पर रक्षासूत्र (कलावा) बांधें।

​धूप-दीप और ध्यान: इसके बाद धूप, दीप प्रज्वलित करें और मां दुर्गा, भगवान श्री राम तथा भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करें।

​भोग लगाएं: भगवान को फल, मिठाई और नारियल का भोग लगाएं।

​नारियल फोड़ना: वाहन पूजन के अंत में वाहन के सामने से एक साबुत नारियल एंटी-क्लॉकवाइज घुमाकर फोड़ें।

​आयुध पूजा के विशेष मंत्र

​पूजा के दौरान नीचे दिए गए मंत्रों का उच्चारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है:

​”शस्त्र देवता पूजनम्, रक्षा कर्ता पूजनम्”

“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥”

​आयुध पूजा से जुड़ी पौराणिक कथाएं

​महिषासुर वध: पौराणिक कथाओं के अनुसार, नौ दिनों तक चले भयंकर युद्ध के बाद जब मां दुर्गा ने राक्षस महिषासुर का वध किया था, तब सभी देवी-देवताओं ने मिलकर उनके अस्त्र-शस्त्रों की पूजा की थी। उसी परंपरा के तहत विजयादशमी पर आयुध पूजा की जाती है।

​भगवान राम और मां अपराजिता: दूसरी धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्री राम ने लंका पर चढ़ाई करने से पहले और विजय प्राप्त करने के लिए मां अपराजिता के साथ अपने अस्त्र-शस्त्रों की पूजा की थी, जिसके बाद उन्होंने विजयादशमी के दिन रावण का वध कर विजय हासिल की थी।

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