देश के वे 7 खास स्थान, जहां दशहरे पर नहीं होता रावण दहन, बल्कि की जाती है पूजा
देश के वे 7 खास स्थान, जहां दशहरे पर नहीं होता रावण दहन, बल्कि की जाती है पूजा
नई दिल्ली:
भारत में विजयदशमी यानी दशहरा मुख्य रूप से बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है, इस दिन देश के अधिकांश हिस्सों में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं। हालांकि, देश की सांस्कृतिक विविधता ऐसी अनूठी परंपराओं को भी संजोए हुए है, जहां रावण के पुतला दहन के बजाय उसकी विद्वत्ता, शिवभक्ति और स्थानीय मान्यताओं के चलते उसकी पूजा की जाती है।
उत्तर प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र और राजस्थान तक, ऐसे 7 प्रमुख स्थान हैं जहां रावण को एक अलग दृष्टिकोण से देखा जाता है:
1. बिसरख (उत्तर प्रदेश): रावण का ननिहाल
ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में स्थित बिसरख गांव को रावण का ननिहाल माना जाता है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार, यहां रावण से जुड़े मंदिर और धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। यहां के कुछ लोग रावण को एक महान विद्वान और भगवान शिव का परम भक्त मानते हैं। इसी गहरी आस्था के कारण यहां दशहरे पर रावण का पुतला जलाने के बजाय उसे सम्मान दिया जाता है।
2. मंदसौर (मध्य प्रदेश): रावण का ससुराल
मध्य प्रदेश का मंदसौर रावण से जुड़ी एक अलग मान्यता के कारण प्रसिद्ध है। लोककथाओं के अनुसार, मंदोदरी का संबंध इसी क्षेत्र से था, जिसके कारण मंदसौर को रावण का ससुराल भी कहा जाता है। यहां रावण की पूजा करने वाले लोग उसे केवल एक पराजित राजा के रूप में नहीं, बल्कि मंदोदरी के पति और विद्वान के रूप में सम्मानित करते हैं।
3. रावनग्राम (मध्य प्रदेश): दशहरे पर होती है पूजा
मध्य प्रदेश के ही रावनग्राम में भी रावण से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं गहराई तक रमी हुई हैं। यहां दशहरे के अवसर पर रावण के पुतले के दहन की परंपरा के विपरीत उसकी विधिवत पूजा किए जाने का विधान है। स्थानीय लोगों की आस्था में रावण का एक विशिष्ट स्थान है।
4. जोधपुर (राजस्थान): रावण के वंशज होने की मान्यता
राजस्थान के जोधपुर में रावण से जुड़ी अनूठी परंपरा देखने को मिलती है। यहां कुछ समुदाय स्वयं को रावण का वंशज मानते हैं और उसे अपना पूर्वज मानकर सम्मान देते हैं। इसी वजह से इन समुदायों के बीच दशहरे के दिन रावण की पूजा करने और शोक या श्रद्धा व्यक्त करने की परंपरा प्रचलित है।
5. काकिनाड (आंध्र प्रदेश): शिवभक्त रावण का मंदिर
आंध्र प्रदेश के काकिनाड में रावण से जुड़ा प्रसिद्ध मंदिर है। रामायण के अनुसार रावण भगवान शिव का परम भक्त था, और इसी रूप को यहां की मान्यताओं में विशेष महत्व दिया जाता है। यहां रावण के साथ भगवान शिव की पूजा की जाती है, जो उसकी विद्वत्ता और साधना को समर्पित है।
6. कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश): शिव तपस्या से जुड़ी लोकमान्यता
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा क्षेत्र में भी रावण की शिवभक्ति से जुड़ी लोकमान्यताएं मिलती हैं। प्रचलित कथाओं के अनुसार, रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इस कारण कुछ स्थानीय लोग रावण का पुतला जलाने से बचते हैं और उसकी पूजा या स्मरण को प्राथमिकता देते हैं।
7. गढ़चिरौली (महाराष्ट्र): आदिवासी समुदायों की परंपरा
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली क्षेत्र में कुछ आदिवासी समुदायों के बीच रावण से जुड़ी अलग धार्मिक मान्यताएं हैं। इन समुदायों की परंपराओं में रावण को सम्मान देने और उसकी पूजा करने का भाव दिखाई देता है। यह परंपरा भारत के आदिवासी समाजों की स्वतंत्र सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताओं का एक अनूठा उदाहरण है।
भारत की यह सांस्कृतिक विविधता इस बात का प्रमाण है कि एक ही पौराणिक कथा को देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थानीय इतिहास, लोककथाओं और समुदायों की आस्था के आधार पर विभिन्न रूपों में देखा और अपनाया जाता है।

