Sunday, October 18, 2026
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उत्तराखंड की सियासत में बड़ा उलटफेर: पांच दिन में बीजेपी से कांग्रेस लौटे ग्यालू लाल, तो पौड़ी में पूर्व विधायक यशपाल बेनाम ने छोड़ा ‘कमल’ का साथ

उत्तराखंड की सियासत में बड़ा उलटफेर: पांच दिन में बीजेपी से कांग्रेस लौटे ग्यालू लाल, तो पौड़ी में पूर्व विधायक यशपाल बेनाम ने छोड़ा ‘कमल’ का साथ

​रुद्रप्रयाग / पौड़ी:

​उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में विधानसभा चुनाव 2027 की सुगबुगाहट के बीच राजनीतिक सरगर्मी अचानक तेज हो गई है। राज्य के दो अलग-अलग जिलों में बड़े राजनीतिक घटनाक्रम सामने आए हैं। रुद्रप्रयाग जिले में बीजेपी में शामिल होने के महज पांच दिन बाद जिला पंचायत सदस्य ग्यालू लाल ने कांग्रेस में घर वापसी कर ली है, वहीं पौड़ी गढ़वाल में कद्दावर नेता और पूर्व विधायक यशपाल बेनाम ने बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।

​रुद्रप्रयाग: जिला पंचायत सदस्य ग्यालू लाल की कांग्रेस में घर वापसी

​रुद्रप्रयाग नगर के गुलाबराय स्थित एक होटल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ग्यालू लाल ने अपने राजनीतिक कदम पर खुलकर बात रखी। उन्होंने स्वीकार किया कि बीजेपी में शामिल होना उनकी सबसे बड़ी गलती थी, जिसे उन्होंने अब सुधार लिया है।

​रणनीति के तहत बीजेपी में जाने का दावा: ग्यालू लाल ने खुलासा किया कि जिला योजना समिति (DPC) के चुनाव में सफलता हासिल करने के लिए यह एक सोची-समझी रणनीति थी। कार्यकर्ताओं से विचार-विमर्श के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया था। डीपीसी सदस्य बनने के बाद उन्होंने अपने पुराने राजनीतिक घर यानी कांग्रेस में लौटने का फैसला किया।

​बीजेपी पर निशाना: उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने उसी की भाषा में जवाब दिया है।

​राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डीपीसी चुनाव के ठीक पहले हुआ यह दल-बदल और फिर पांच दिन के भीतर वापसी केवल एक संयोग नहीं, बल्कि स्थानीय समीकरणों को साधने की एक सोची-समझी रणनीति थी, जिसने जिले की सियासत में नई बहस छेड़ दी है।

​पौड़ी: पूर्व विधायक यशपाल बेनाम ने छोड़ी बीजेपी, आठ साल बाद दिया इस्तीफा

​दूसरी ओर, पौड़ी जनपद में बीजेपी को एक बड़ा झटका लगा है। पौड़ी विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक और पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष यशपाल बेनाम ने पार्टी में घुटन महसूस होने का हवाला देते हुए 18 अक्टूबर को बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। संयोग देखिए कि ठीक आठ साल पहले (18 अक्टूबर को ही) उन्होंने बीजेपी का दामन थाम था।

​पार्टी पर अनदेखी का आरोप: यशपाल बेनाम ने अपने इस्तीफे के पीछे व्यक्तिगत कारणों के साथ-साथ पार्टी में खुद को सही ढंग से न समझे जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आठ साल बिताने के बावजूद पार्टी ने उनकी राजनीतिक क्षमताओं का समुचित उपयोग नहीं किया। उन्हें इस तरह की घुटन भरी परिस्थितियों में जीने की आदत नहीं है।

​निर्दलीय राजनीति का रहा है इतिहास: यशपाल बेनाम पौड़ी की राजनीति के एक जाने-माने और प्रभावशाली चेहरे रहे हैं। वह 2007 में पौड़ी सीट से विधायक चुने गए थे और इसके अलावा दो बार निर्दलीय तथा एक बार बीजेपी के टिकट पर नगरपालिका अध्यक्ष रह चुके हैं।

​भविष्य का कदम: हालांकि बेनाम ने अभी अपने अगले राजनीतिक सफर को लेकर पत्ते नहीं खोले हैं और कहा है कि वह जल्द ही अपने समर्थकों से चर्चा कर निर्णय लेंगे, लेकिन उनके इस फैसले को आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पौड़ी की राजनीति में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है।

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