मोहम्मद शमी की अनदेखी पर उठे सवाल: न्यूजीलैंड दौरे के लिए टीम इंडिया में चयन न होने से चयनकर्ताओं की रणनीति पर बहस तेज
मोहम्मद शमी की अनदेखी पर उठे सवाल: न्यूजीलैंड दौरे के लिए टीम इंडिया में चयन न होने से चयनकर्ताओं की रणनीति पर बहस तेज
नई दिल्ली:
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) द्वारा न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी 5 मैचों की वनडे और 2 टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए घोषित भारतीय टीम से अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को एक बार फिर बाहर रखे जाने के बाद क्रिकेट गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। चयन समिति के अंतरिम मुख्य चयनकर्ता प्रज्ञान ओझा के कार्यकाल में भी शमी को नजरअंदाज किए जाने से यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि चयनकर्ता भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखते हुए टीम को एक नई दिशा देने पर विचार कर रहे हैं।
लगातार शानदार प्रदर्शन के बावजूद बाहर क्यों हैं शमी?
चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल के बाद से दूरी: मोहम्मद शमी ने आखिरी बार 9 मार्च 2025 को चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल मैच खेला था, जिसके बाद से वह लगातार टीम इंडिया से बाहर चल रहे हैं।
घरेलू क्रिकेट में दमदार प्रदर्शन: टीम से बाहर होने के बावजूद शमी ने लगातार घरेलू क्रिकेट (रणजी ट्रॉफी) में हिस्सा लिया और अपनी फॉर्म व फिटनेस का पूरा सबूत दिया। इसके बावजूद उन्हें नजरअंदाज किया जाना खेल प्रेमियों और विशेषज्ञों के लिए हैरानी का विषय बना हुआ है।
भुवनेश्वर कुमार की वापसी से जगी थी उम्मीद: हाल ही में अंतरिम मुख्य चयनकर्ता प्रज्ञान ओझा की पहली चयन समिति ने 36 वर्षीय भुवनेश्वर कुमार को 4 साल बाद टीम इंडिया में वापस बुलाकर सबको चौंका दिया था। इसके बाद यह उम्मीद जताई जा रही थी कि जसप्रीत बुमराह की अनुपस्थिति में अनुभवी शमी को भी न्यूजीलैंड दौरे के लिए वनडे टीम में जगह मिल जाएगी, लेकिन शुक्रवार को आए स्क्वॉड में उनका नाम नदारद रहा।
चयनकर्ताओं की रणनीति पर उठ रहे सवाल
आगामी वनडे विश्व कप 2027 में अब लगभग एक साल का समय ही शेष है। ऐसे में चयन समिति ने युवा और उभरते गेंदबाजों को तरजीह दी है:
युवाओं को मौका: न्यूजीलैंड दौरे के लिए प्रसिद्ध कृष्णा (फिटनेस के अधीन), अंशुल कंबोज, यश ठाकुर और आकिब नबी जैसे गेंदबाजों को टीम में शामिल किया गया है।
विशेषज्ञों की राय: क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि भले ही युवा गेंदबाजों को तराशने की जरूरत है, लेकिन 108 वनडे मैचों में 206 विकेट ले चुके और 2023 विश्व कप के मात्र 7 मैचों में 24 विकेट झटकने वाले शमी के अनुभव की कमी को तुरंत पूरा नहीं किया जा सकता। दक्षिण अफ्रीकी परिस्थितियों और बड़े टूर्नामेंट्स में शमी की मारक गेंदबाजी क्षमता को नजरअंदाज करना टीम के लिए भारी पड़ सकता है।
फिलहाल, इस बात के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि चयनकर्ता शमी से आगे बढ़ चुके हैं और आगामी बड़े टूर्नामेंटों के लिए एक नई तेज गेंदबाजी इकाई तैयार करने पर फोकस कर रहे हैं।

