Saturday, October 17, 2026
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शारदीय नवरात्रि 2026: आज की जा रही है मां दुर्गा के सातवें स्वरूप ‘मां कालरात्रि’ की अलौकिक पूजा, जानें शुभ मुहूर्त, स्वरूप और विधि

शारदीय नवरात्रि 2026: आज की जा रही है मां दुर्गा के सातवें स्वरूप ‘मां कालरात्रि’ की अलौकिक पूजा, जानें शुभ मुहूर्त, स्वरूप और विधि

​नई दिल्ली:

​शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व अब अपने अंतिम और बेहद खास पड़ाव पर है। नवरात्रि के सातवें दिन यानी शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि दुष्टों और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाली तथा अपने भक्तों को हर प्रकार के भय, संकट और बाधाओं से मुक्ति दिलाने वाली देवी हैं।

​सप्तमी तिथि और शुभ मुहूर्त

​पंचांग के गणना के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 17 अक्टूबर 2026 को सुबह 5:54 बजे से शुरू होकर 18 अक्टूबर को सुबह 8:28 बजे तक रहेगी। सप्तमी तिथि दो दिन होने के कारण स्थानीय पंचांग और क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार व्रत और पूजन किया जा रहा है।

​17 अक्टूबर के लिए प्रमुख मुहूर्त:

​ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:52 बजे से 5:40 बजे तक

​अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक

​मां कालरात्रि का स्वरूप और धार्मिक महत्व

​पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, मां कालरात्रि का स्वरूप अत्यंत प्रभावशाली और उग्र है, लेकिन उनका स्वभाव अपने भक्तों के लिए हमेशा कल्याणकारी (शुभंकरी) होता है:

​स्वरूप व वर्ण: माता का वर्ण घने अंधकार की तरह काला (श्याम) है। उनके बाल खुले हुए हैं और वे वाहन के रूप में गर्दभ (गधे) पर सवार हैं।

​मुद्रा व आभूषण: माता के गले में विद्युत जैसी चमकने वाली माला है और उनके तीनों नेत्र ब्रह्मांड की तरह गोल व विशाल हैं। उनके दाहिने ऊपर वाले हाथ में वर मुद्रा और नीचे वाले हाथ में अभय मुद्रा है, जबकि बाएं ऊपर वाले हाथ में लोहे का कांटा और नीचे वाले हाथ में खड़ग (कटार) सुशोभित है।

​मान्यता है कि इनकी आराधना करने से भक्तों के मन से अकाल मृत्यु का भय, रोग, शोक और समस्त नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।

​मां कालरात्रि की पूजा विधि

​सप्तमी तिथि के दिन मां कालरात्रि की विधि-विधान से पूजा करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन किया जाता है:

​स्नान व शुद्धि: सुबह जल्दी उठकर स्ਨान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें।

​पूजन सामग्री: मां की प्रतिमा या तस्वीर के सामने शुद्ध देसी घी का दीपक और धूपबत्ती जलाएं।

​अर्चन व भोग: माता को रोली, अक्षत, ताजे फूल और विशेष रूप से गुड़ या गुड़ से बनी मिठाइयों का भोग अर्पित करें।

​मंत्र जाप व पाठ: पूजा के दौरान ‘दुर्गा सप्तशती’ का पाठ करें और मां कालरात्रि के बीज मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करें। अंत में कपूर या दीपक जलाकर आरती करें और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें।

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