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अमेरिका में मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान के खिलाफ ‘MOAB’ के इस्तेमाल की सुगबुगाहट, सैन्य योजनाओं पर गरमाई राजनीति

अमेरिका में मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान के खिलाफ ‘MOAB’ (मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स) के इस्तेमाल की सुगबुगाहट, सैन्य योजनाओं पर गरमाई राजनीति

​वाशिंगटन / तेहरान:

​अमेरिका में अगले महीने होने वाले मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले अंतरराष्ट्रीय राजनीति और मध्य एशिया के सामरिक समीकरणों में एक बार फिर भारी हलचल पैदा हो गई है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स (CNN) के हवाले से यह जानकारी सामने आई है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और परमाणु ठिकानों के खिलाफ अमेरिका के सबसे शक्तिशाली गैर-परमाणु बम GBU-43/B मैसिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट (MOAB)—जिसे लोकप्रिय रूप से ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ (Mother of All Bombs) कहा जाता है—के उपयोग की सैन्य योजनाओं पर विचार कर रहे हैं।

​क्या है अमेरिकी सैन्य योजना?

​सूत्रों और अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों की नई रूपरेखा तैयार की है।

​समय और राजनीतिक दबाव: देश में लोकप्रियता में आई गिरावट और अलोकप्रिय युद्ध को समाप्त करने के घरेलू राजनीतिक दबाव के बीच, रिपब्लिकन पार्टी को आगामी मध्यावधि चुनावों में मतदाताओं की नाराजगी का अंदेशा है। ऐसे में माना जा रहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप चुनावों से पहले या बाद में कभी भी इस सैन्य विकल्प पर मुहर लगा सकते हैं।

​रणनीतिक प्रभाव पर संदेह: हालांकि आंतरिक चर्चाओं से जुड़े कई सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस बम का इस्तेमाल युद्ध का रुख पलटने में कितना असरदार होगा, इसे लेकर संदेह बरकरार है, क्योंकि पिछले छह महीनों से अधिक समय से जारी अमेरिकी बमबारी के बावजूद दोनों देश कूटनीतिक बातचीत के किसी ठोस समाधान के करीब नहीं पहुंच पाए हैं।

​क्या है सर्वशक्तिमान बम ‘MOAB’?

​क्षमता और वजन: MOAB (Massive Ordnance Air Blast) अमेरिकी सेना का अब तक का सबसे बड़ा और विनाशकारी पारंपरिक (गैर-परमाणु) बम है। इसका कुल वजन लगभग 9,800 किलोग्राम (21,600 पाउंड) और लंबाई करीब 30 फीट है।

​विस्फोटक क्षमता: इसमें लगभग 8,500 किलोग्राम H-6 विस्फोटक भरा होता है, जो 11 टन TNT के बराबर का भीषण धमाका उत्पन्न करता है। यह एक GPS-गाइड्ड स्मार्ट वेपन है, जो सटीक निशानों पर हमला करने में सक्षम है।

​इतिहास और ISIS कनेक्शन: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान 2017 में अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत में ISIS के भूमिगत सुरंग नेटवर्क के खिलाफ इस बम के इस्तेमाल की पहली बार मंजूरी दी थी। उस हमले में दर्जनों आतंकवादी मारे गए थे, हालांकि इसके भारी-भरकम इस्तेमाल और विध्वंसक असर को लेकर वैश्विक स्तर पर तीखे सवाल भी उठे थे।

​यदि अमेरिका ईरान के खिलाफ इस विशालकाय बम का इस्तेमाल करता है, तो इससे मध्य पूर्व और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में तनाव का पारा एक बार फिर सातवें आसमान पर पहुंचना तय है।

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