Friday, October 16, 2026
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अंकिता भंडारी हत्याकांड में एसआईटी जांच, आजीवन कारावास की सजा और सीबीआई जांच पर एडीजी डॉ. वी. मुरुगेशन का बयान

अंकिता भंडारी हत्याकांड में एसआईटी जांच, आजीवन कारावास की सजा और सीबीआई जांच पर एडीजी डॉ. वी. मुरुगेशन का बयान

​देहरादून:

​अपर पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) उत्तराखंड, डॉ. वी. मुरुगेशन ने पुलिस मुख्यालय, देहरादून में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस दौरान उन्होंने बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड की अब तक की संपूर्ण जांच, विशेष जांच दल (SIT) की कार्रवाई, अदालत द्वारा दोषियों को सुनाई गई सजा और वर्तमान में चल रही सीबीआई जांच के संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की।

​घटना के 24 घंटे के भीतर हुई थी आरोपियों की गिरफ्तारी

​डॉ. मुरुगेशन ने बताया कि वर्ष 2022 में ऋषिकेश के निकट वनंतरा रिजॉर्ट में कार्यरत युवती स्व. अंकिता भंडारी के साथ हुई इस अत्यंत दुखद घटना के सामने आने पर उत्तराखंड पुलिस ने बिना देर किए त्वरित कार्रवाई की। पुलिस टीमों ने आपसी समन्वय दिखाते हुए घटना के महज 24 घंटे के भीतर तीनों मुख्य अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया था।

​एसआईटी (SIT) का गठन और 88 दिनों में चार्जशीट

​प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देशों पर तत्काल एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था। जांच की पारदर्शिता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए डीआईजी स्तर की एक महिला आईपीएस अधिकारी को एसआईटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

​एसआईटी की कार्यप्रणाली के मुख्य बिंदु इस प्रकार रहे:

​साक्ष्यों का संकलन: एसआईटी ने विवेचना के दौरान डिजिटल, तकनीकी, फॉरेंसिक और भौतिक साक्ष्यों का बेहद बारीकी से संकलन किया।

​वैज्ञानिक विश्लेषण: अभियुक्तों से लंबी पूछताछ, फॉरेंसिक रिपोर्टों और गवाहों के बयानों का गहन विश्लेषण किया गया।

​त्वरित आरोपपत्र: एसआईटी ने रिकॉर्ड समय यानी मात्र 88 दिनों में जांच पूरी कर लगभग 500 पृष्ठों का विस्तृत आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया था।

​अदालत का फैसला: तीनों दोषियों को आजीवन कठोर कारावास

​अपर पुलिस महानिदेशक ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा इस मामले की त्वरित सुनवाई (Fast Track Trial) और अदालत में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए। एसआईटी द्वारा जुटाए गए पुख्ता सबूतों और अभियोजन पक्ष की दमदार पैरवी के परिणामस्वरूप 30 मई 2025 को कोटद्वार स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

​न्यायालय ने तीनों अभियुक्तों—पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता—को दोषी करार देते हुए आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई। डॉ. मुरुगेशन ने पुष्टि की कि ये तीनों दोषी वर्तमान में जेल में बंद हैं और अपनी सजा काट रहे हैं।

​प्रकरण में सीबीआई जांच पर अपडेट

​प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सीबीआई जांच के संबंध में जानकारी देते हुए एडीजी ने बताया कि इस प्रकरण में एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार से सीबीआई जांच की संस्तुति की थी। केंद्र सरकार द्वारा इस संस्तुति को स्वीकार किए जाने के बाद वर्तमान में प्रकरण से जुड़ी सीबीआई जांच की कार्यवाही गतिमान है। उत्तराखंड पुलिस ने अपनी जांच और कानूनी कार्रवाई का विवरण साझा करते हुए स्पष्ट किया है कि न्याय सुनिश्चित करने के लिए सभी पहलुओं पर निष्पक्षता से काम किया गया है।

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