Friday, October 16, 2026
Latest:
अन्तर्राष्ट्रीय

पश्चिमी लंदन में UAE की शाही महिला महराह अल नहयान सड़क पर बेसुध मिलीं, बच्चे की देखरेख में लापरवाही के मामले में अदालत ने सुनाई सजा

पश्चिमी लंदन में UAE की शाही महिला महराह अल नहयान सड़क पर बेसुध मिलीं, बच्चे की देखरेख में लापरवाही के मामले में अदालत ने सुनाई सजा

​लंदन:

​पश्चिमी लंदन की एक सड़क पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के शाही परिवार से जुड़ी एक महिला के बेहोश मिलने और बच्चे की सुरक्षा को खतरे में डालने का मामला सामने आया है। इस घटना से जुड़ा मामला मंगलवार को लंदन के साउथवार्क क्राउन कोर्ट में सुना गया, जहां आरोपी महिला ने बच्चे की देखरेख में लापरवाही बरतने का जुर्म स्वीकार कर लिया है।

​क्या है पूरा मामला?

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, गत 13 जून को 32 वर्षीय महराह अल नहयान (जिन्होंने शादी के जरिए अबू धाबी के शाही परिवार में प्रवेश किया है) पश्चिमी लंदन की एक सड़क पर रेलिंग के सहारे बेसुध हालत में बैठी पाई गईं।

​उनके पास ही एक अन्य व्यक्ति भी अचेत अवस्था में था, जबकि एक छोटा बच्चा बिना जूते-चप्पल के सड़क के पास अकेला खेल रहा था।

​वहां से गुजरने वाले राहगीरों ने जब देखा कि भारी ट्रैफिक के बीच बच्चा बिल्कुल अकेला और असुरक्षित है, तो वे तुरंत मदद के लिए आगे आए और पुलिस के आने तक खुद बच्चे की देखभाल की।

​होश में आने पर दिया अजीब बयान

​अभियोजन पक्ष के अनुसार, जब महराह अल नहयान को होश आया, तो उन्होंने मौके पर मौजूद लोगों से कथित तौर पर कहा:

​”यह कोई कसाईखाना तो है नहीं, तो आप लोग इतनी परवाह क्यों कर रहे हैं? आप लोग इतने परेशान क्यों हैं?”

​पुलिस द्वारा तलाशी लिए जाने पर उनके पास से नशीले पदार्थों से जुड़ी सामग्री तो मिली, लेकिन कोई अवैध ड्रग्स बरामद नहीं हुआ। जांच में यह भी सामने आया कि महराह को हर महीने 8,000 पाउंड का भत्ता मिलता है।

​बचाव पक्ष की दलीलें और इलाज

​अजरा के वकील स्टीफन वुलो KC ने अदालत में उनका बचाव करते हुए कहा कि घटना वाले दिन उन्होंने ड्रग्स नहीं लिए थे, लेकिन उससे पहले के दिनों में कोकीन के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण वह बुरी तरह थक गई थीं। वकील ने अदालत को बताया कि महराह को अपनी गलती का गहरा पछतावा है और वह अपनी इस लत से पूरी तरह बाहर आना चाहती हैं। वर्तमान में उन्हें नशे की लत से उबारने के लिए सरे के वोकिंग स्थित प्रायरी क्लिनिक में भर्ती कराया गया है, जहां वह तीन महीने का पुनर्वास कार्यक्रम पूरा करना चाहती हैं।

​अदालत का फैसला और जज की कड़ी टिप्पणी

​मामले की सुनवाई करते हुए जज मिस्टर जस्टिस जॉनसन KC ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अगर सतर्क राहगीर समय पर बीच-बचाव न करते, तो यह स्थिति किसी बड़ी त्रासदी में बदल सकती थी। जज ने चेतावनी दी कि बच्चा सड़क पर भटक सकता था, ट्रैफिक का शिकार हो सकता था या किसी अजनबी के साथ जा सकता था।

​अदालत ने महराह अल नहयान को सजा सुनाते हुए दो साल का ‘कम्युनिटी ऑर्डर’ (जिसमें अनिवार्य पुनर्वास शामिल है) दिया है और उन पर कुल 6,114 पाउंड का जुर्माना लगाया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *