अमेरिका में हिंदू मंदिर पर हमले की साजिश: विदेश मंत्रालय ने जताई कड़ी चिंता, नस्लीय नफरत और भारत-विरोधी भावनाओं के खिलाफ ठोस कदम उठाने की मांग
अमेरिका में हिंदू मंदिर पर हमले की साजिश: विदेश मंत्रालय ने जताई कड़ी चिंता, नस्लीय नफरत और भारत-विरोधी भावनाओं के खिलाफ ठोस कदम उठाने की मांग
नई दिल्ली:
अमेरिका के इलिनोइस राज्य के ऑरोरा इलाके में एक हिंदू मंदिर को निशाना बनाकर सामूहिक गोलीबारी करने की एक बड़ी साजिश का मामला सामने आने के बाद भारत सरकार ने इस पर बेहद कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा है कि यह अमेरिका में बढ़ती नस्लीय नफरत और भारत-विरोधी भावनाओं की खतरनाक प्रवृत्ति को उजागर करती है।
विदेश मंत्रालय का आधिकारिक बयान
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि ऑरोरा इलाके के एक हिंदू मंदिर पर हमले की साजिश की खबरें बेहद चिंताजनक हैं। इस पूरी साजिश में हिंदू-विरोधी और नस्लभेदी सोच साफ तौर पर दिखाई देती है, और भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ हिंसा से जुड़े कथित उल्लेख इसे और भी ज्यादा परेशान करने वाला बनाते हैं।
मंत्रालय ने कहा कि हमने इस मामले में अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा उठाए गए त्वरित कदमों पर ध्यान दिया है, जिसमें संदिग्ध की गिरफ्तारी और उस पर लगाए गए गंभीर आरोप शामिल हैं। भारत ने उम्मीद जताई है कि अमेरिकी अधिकारी इस मामले की पूरी और निष्पक्ष जांच करेंगे, दोषियों को कानून के तहत कड़ी सजा दिलाएंगे और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएंगे। साथ ही, विदेश मंत्रालय ने जोर दिया कि ऐसे मामलों में अधिक सतर्कता बरतने, नफरत से प्रेरित हिंसा के खिलाफ ‘बिल्कुल बर्दाश्त न करने’ (Zero Tolerance) की नीति अपनाने और भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस उपाय करने की सख्त जरूरत है।
क्या है पूरी घटना?
अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, ऑरोरा इलाके में स्थित एक हिंदू मंदिर में फायरिंग की इस खौफनाक साजिश को अंजाम देने से ठीक पहले ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।
राइफल जाम होने से टला बड़ा हादसा: जांच में यह बात सामने आई कि फायरिंग करने से ठीक पहले हमलावर की राइफल जाम हो गई थी, जिससे एक बड़ा नरसंहार टल गया। इसके बाद उसे पुलिस ने धर दबोचा।
खुद को बताया नियो-नाजी: गिरफ्तार किए गए 19 वर्षीय आरोपी ने खुद को ‘व्हाइट सुप्रेमेसिस्ट नियो-नाजी’ (White Supremacist Neo-Nazi) बताया है। उसे स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां उस पर आतंकवादी धमकी देने और अवैध रूप से हथियार रखने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
सहकर्मी की सतर्कता से बची जान: इस साजिश का खुलासा तब हुआ जब आरोपी के एक सहकर्मी (जिसकी पहचान गोपनीय रखी गई है) को उसकी मंशा पर शक हुआ। आरोपी ने अपने सहकर्मी को एक फोटो भेजी थी जिसमें वह टैक्टिकल वेस्ट पहने नजर आ रहा था, साथ ही उसने आठ पन्नों का एक दस्तावेज भी भेजा था। सहकर्मी ने तुरंत इसकी सूचना माउंट प्रॉस्पेक्ट पुलिस को दी, जिसके बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए पैलेटाइन पुलिस के सहयोग से आरोपी को दबोच लिया गया।

