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DRDO ने चांदीपुर में किया क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (QKD) तकनीक का सफल परीक्षण, रक्षा संचार बनेगा और अधिक सुरक्षित

DRDO ने चांदीपुर में किया क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (QKD) तकनीक का सफल परीक्षण, रक्षा संचार बनेगा और अधिक सुरक्षित

​चांदीपुर/नई दिल्ली:

​आधुनिक युद्धक्षेत्र में तकनीक के बढ़ते प्रभाव और संवेदनशील डेटा सुरक्षा की चुनौतियों के बीच भारत ने अपने रक्षा संचार (Defense Communication) को अभेद्य बनाने की दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के चांदीपुर में क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (Quantum Key Distribution – QKD) तकनीक का सफल परीक्षण किया है। इस तकनीक के जरिए हथियारों की लाइव टेस्टिंग और रियल-टाइम डेटा ट्रांसफर को बिना किसी जासूसी या दखल के पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सकेगा।

​लाइव संचार नेटवर्क पर किया गया सफल परीक्षण

डीआरडीओ की ओर से बुधवार (14 अक्टूबर 2026) को इस सफल परीक्षण का औपचारिक ऐलान किया गया। डीआरडीओ की टीम ने चांदीपुर स्थित ‘प्रूफ एंड एक्सपेरिमेंटल’ परीक्षण क्षेत्र के लाइव संचार नेटवर्क में इस प्रणाली का सफल प्रदर्शन किया। तोपों, बख्तरबंद हथियारों और मिसाइलों के परीक्षण व मूल्यांकन के दौरान एकत्र की जाने वाली महत्वपूर्ण जानकारियों और आंकड़ों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक सुरक्षित भेजने में यह तकनीक क्रांतिकारी साबित होगी।

​क्या है क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (QKD) तकनीक?

क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (QKD) तकनीक क्वांटम फिजिक्स (भौतिकी) के मूलभूत सिद्धांतों पर काम करती है, जिसका उपयोग एन्क्रिप्शन में काम आने वाली डिजिटल चाबियां (Cryptographic Keys) तैयार करने और उन्हें साझा करने के लिए किया जाता है।

​अतिरिक्त सुरक्षा सुविधा: सामान्य क्रिप्टोग्राफी की तुलना में QKD की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अगर कोई अनधिकृत व्यक्ति या हैकर संचार के दौरान जानकारी हासिल करने या सुनने की कोशिश करता है, तो यह प्रणाली तुरंत उसका पता लगा लेती है और अलर्ट जारी कर देती है।

​टैकबिट लैब्स के सहयोग से किया गया विकसित

डीआरडीओ ने इस QKD प्लेटफॉर्म को अपने ‘माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस, कंप्यूटेशनल सिस्टम्स एंड साइबर सिक्योरिटी’ (MCC) क्लस्टर के तहत प्रोडक्शन पार्टनर टैकबिट लैब्स (Tacbit Labs) के सहयोग से डिजाइन और विकसित किया है।

​क्वांटम-रेसिस्टेंट सुरक्षा से कैसे अलग है QKD?

हालांकि QKD और ‘क्वांटम-रेसिस्टेंट एल्गोरिदम’ दोनों का मुख्य उद्देश्य डेटा सुरक्षा है, लेकिन उनके तरीके अलग हैं। जहां QKD भौतिकी के सिद्धांतों का उपयोग करके क्रिप्टोग्राफिक कुंजियां बांटता है, वहीं क्वांटम-रेसिस्टेंट एल्गोरिदम जटिल गणितीय तरीकों पर आधारित होते हैं। इन्हें मौजूदा आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर पर लागू किया जा सकता है ताकि भविष्य के शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटरों के हमलों से डेटा को बचाया जा सके।

​रक्षा से लेकर बैंकिंग और टेलीकॉम क्षेत्र में उपयोग

क्वांटम संचार तकनीक की उपयोगिता केवल रक्षा क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है। इसका इस्तेमाल बैंकिंग, वित्तीय संस्थानों, रणनीतिक अवसंरचना और टेलीकम्युनिकेशन जैसे अति-संवेदनशील क्षेत्रों में डेटा की पूर्ण सुरक्षा के लिए किया जा सकता है।

​अस्त्र (Astra) मिसाइल की रेंज बढ़ाने पर भी तेज़ी से काम कर रहा है DRDO

​इसी दौरान डीआरडीओ की एक अन्य प्रमुख उपलब्धि की जानकारी भी सामने आई है। डीआरडीओ इस समय भारत की स्वदेशी हवा-से-हवा में मार करने वाली ‘अस्त्र’ (Astra) मिसाइल की मारक क्षमता बढ़ाने पर लगातार काम कर रहा है।

​अस्त्र-1 (Astra-1): भारतीय वायुसेना (IAF) में पहले से शामिल ‘अस्त्र-1’ मिसाइल की शुरुआती रेंज लगभग 100 किलोमीटर थी, जिसे बढ़ाकर 160 किलोमीटर तक करने की तैयारी पूरी की जा चुकी है।

​300 किमी रेंज पर काम जारी: इसके साथ ही डीआरडीओ अब इस मिसाइल के उन्नत संस्करण पर काम कर रहा है, जिससे इसकी मारक क्षमता को बढ़ाकर 300 किलोमीटर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। यह क्षमता भारतीय वायुसेना को लंबी दूरी के हवाई मुकाबलों में जबरदस्त बढ़त प्रदान करेगी।

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