राजनीति

TMC ने चुनाव आयोग के नए अभियान पर उठाए सवाल, एसआईआर को बताया पक्षपातपूर्ण

पश्चिम बंगाल: टीएमसी ने चुनाव आयोग के नए अभियान पर उठाए सवाल, एसआईआर को बताया पक्षपातपूर्ण

​कोलकाता:

​पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस (TMC) गुट ने मंगलवार को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय द्वारा शुरू किए गए नए मतदाता पंजीकरण अभियान पर कड़ा ऐतराज जताया है। टीएमसी ने आरोप लगाया कि सीईओ कार्यालय का यह कदम परोक्ष रूप से इस बात की स्वीकारोक्ति है कि ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) अभियान जल्दबाजी और अव्यवस्थित तरीके से चलाया गया था।

​टीएमसी का चुनाव आयोग पर सीधा हमला

तृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में कहा कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी का नया अभियान चुनाव आयोग की निष्पक्षता और तटस्थता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पार्टी ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के नाम पर पात्र मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए ताकि भारतीय जनता पार्टी को उन सीटों पर बढ़त दिलाई जा सके, जिनकी उसने कल्पना भी नहीं की थी।

​टीएमसी ने सवाल उठाते हुए कहा:

​”चुनाव से पहले पात्र मतदाताओं के नाम काटने के बाद, अब आयोग अचानक नया अभियान चलाकर यह सुनिश्चित करने का नाटक कर रहा है कि कोई मतदाता छूट न जाए। चुनाव से पहले यह सक्रियता कहां थी? एसआईआर प्रक्रिया इतनी जल्दबाजी और बिना योजना के क्यों कराई गई?”

​पार्टी ने आगे कहा कि ईसीआई को इन विसंगतियों पर जनता को स्पष्टीकरण देना चाहिए, क्योंकि नागरिकों के मतदान के अधिकार को प्रभावित कर बनाई जाने वाली किसी भी व्यवस्था की वैधता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

​सीईओ कार्यालय का रुख और विशेष शिविर

इससे पहले सोमवार को सीईओ कार्यालय ने घोषणा की थी कि राज्य के सभी 24 जिलों के जिला मजिस्ट्रेटों (DM) और जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) को छूट गए पात्र मतदाताओं तथा पहली बार के युवा मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए सक्रिय अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।

​सीईओ कार्यालय के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रहे। इसके लिए पूरे राज्य में विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति को मतदाता सूची से जुड़ी कोई शिकायत है, तो वह अपने बूथ लेवल अधिकारी (BLO), एईआरओ (AERO), ईआरओ (ERO) या जिला निर्वाचन अधिकारी से संपर्क कर समाधान प्राप्त कर सकता है।

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