उत्तराखंड के गोलू देवता की लोकगाथा पर बनेगी फिल्म ‘बाला गोरिया’, ‘हनुमान अंश’ की सफलता के बाद मेकर्स को उम्मीदें
उत्तराखंड के गोलू देवता की लोकगाथा पर बनेगी फिल्म ‘बाला गोरिया’, ‘हनुमान अंश’ की सफलता के बाद मेकर्स को उम्मीदें
देहरादून:
धार्मिक आस्था, पौराणिक कथाओं और भारतीय लोककथाओं पर आधारित फिल्मों के दौर में अब उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक देवता ‘गोलू देवता’ की गाथा भी बड़े पर्दे पर उतरने जा रही है। फिल्म का नाम ‘बाला गोरिया’ रखा गया है, जो कुमाऊं क्षेत्र में न्याय के देवता के रूप में पूजे जाते हैं।
फिल्म की रिलीज और पृष्ठभूमि
शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फिल्म 16 अक्टूबर को रिलीज होने वाली थी, लेकिन हाल ही में नीम करोली बाबा के जीवन से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ की शानदार बॉक्स ऑफिस सफलता को देखते हुए इसकी रिलीज को टाल दिया गया है। ट्रेड रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘हनुमान अंश’ का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 435 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है। शुरुआती सुस्त शुरुआत के बाद इस फिल्म को दर्शकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला, जिससे ‘बाला गोरिया’ के मेकर्स भी खासे उत्साहित हैं और अब इस फिल्म के नवंबर में रिलीज होने की संभावना जताई जा रही है।
चूंकि ‘हनुमान अंश’ (नीम करोली बाबा) की ख्याति देश-दुनिया में है, इसलिए उसे व्यापक दर्शक वर्ग मिला। इसके विपरीत, गोलू देवता की मुख्य आस्था उत्तराखंड और विशेषकर कुमाऊं क्षेत्र से जुड़ी है। ऐसे में ‘बाला गोरिया’ के निर्माताओं को अन्य राज्यों के दर्शकों तक इस अनूठी लोककथा को पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर प्रचार (हाई प्रमोशन) की रणनीति अपनानी होगी।
क्या है गोलू देवता की लोकगाथा?
उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में गोलू देवता को ‘गोल्ज्यू महाराज’ और ‘न्याय के देवता’ के रूप में अगाध श्रद्धा के साथ पूजा जाता है। अल्मोड़ा के चितई, चंपावत और घोड़ाखाल में उनके भव्य और प्रसिद्ध मंदिर स्थित हैं। स्थानीय मान्यताओं और परंपरा के अनुसार, गोलू देवता के दरबार में आने वाले श्रद्धालु अपनी समस्याएं, दुख और शिकायतें सादे कागज़ या चिट्ठियों में लिखकर अर्पित करते हैं। मन्नत पूरी होने पर भक्तगण मंदिर में घंटियां चढ़ाकर उनका आभार व्यक्त करते हैं।
लोककथाओं के अनुसार, गोलू देवता का जन्म एक राजपरिवार में हुआ था। परिवार के भीतर रची गई साजिशों और बाधाओं के बावजूद वह सुरक्षित बचे और आगे चलकर अपने निष्पक्ष न्याय के लिए इतिहास में अमर हो गए। आम जनमानस में उनकी छवि एक ऐसे न्यायप्रिय देवता के रूप में स्थापित है, जिनसे हर पीड़ित व्यक्ति अन्याय के खिलाफ गुहार लगाता है।

