खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन और आपातकाल पर एमनेस्टी इंटरनेशनल ने जताई गंभीर चिंता, नेताओं की हिरासत पर उठाए सवाल
खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन और आपातकाल पर एमनेस्टी इंटरनेशनल ने जताई गंभीर चिंता, नेताओं की हिरासत पर उठाए सवाल
पेशावर/इस्लामाबाद:
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में संघीय सरकार द्वारा आपातकाल लागू किए जाने और गवर्नर शासन लगाए जाने के बाद स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल’ ने मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी सहित प्रमुख नेताओं की मनमानी हिरासत, प्रांत में इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदी और सशस्त्र बलों की तैनाती पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल की कड़ी प्रतिक्रिया
एमनेस्टी इंटरनेशनल (दक्षिण एशिया) के उपनिदेशक बाबू राम पंत ने पाकिस्तान सरकार के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि सार्वजनिक आपात स्थिति का हवाला देकर मानवाधिकारों का दमन और असहमति की आवाजों को दबाना कतई जायज नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि खैबर पख्तूनख्वा में सेना की तैनाती से क्षेत्र का और अधिक सैन्यीकरण होगा, जिससे बल प्रयोग और मानवाधिकारों के उल्लंघन की आशंका बढ़ जाएगी। संगठन ने मांग की है कि आपातकाल के तहत की जा रही सभी कार्रवाइयों की स्वतंत्र निगरानी सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री गिरफ्तार, गवर्नर हाउस में आगजनी
पाकिस्तान की संघीय सरकार द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी ‘पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ’ (PTI) के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार को निलंबित किए जाने के बाद पुलिस ने मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी और उनके मंत्रिमंडल के कई सदस्यों को हिरासत में ले लिया है। पाकिस्तान के गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी के अनुसार, हिरासत में लिए गए नेताओं पर लंबित कानूनी मामलों में मुकदमा चलाया जाएगा।
इस बीच, राजनीतिक तनाव के चलते हिंसा भी भड़क उठी है। उपद्रवियों द्वारा गवर्नर हाउस में आग लगा दी गई, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। कई शहरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुई हैं, जहां पुलिस को आंसू गैस के गोले और गोलियां चलानी पड़ीं।
विपक्षी दलों ने बताया लोकतंत्र पर हमला
पीटीआई और अन्य विपक्षी दलों ने संघीय सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए इसे “लोकतंत्र पर सीधा हमला” और निर्वाचित नेतृत्व को कमजोर करने की साजिश करार दिया है। पीटीआई ने चेतावनी दी है कि इस फैसले के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने के साथ-साथ सड़क पर जन आंदोलन शुरू किया जाएगा।

