उत्तराखंड

हेमकुंड साहिब और लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद, श्रद्धालुओं की भारी भीड़

हेमकुंड साहिब और लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद, श्रद्धालुओं की भारी भीड़

​सखों के प्रसिद्ध और पवित्र हिमालयी तीर्थ स्थल हेमकुंड साहिब के कपाट शनिवार को हल्की बर्फबारी के बीच शीतकाल के लिए विधिवत बंद कर दिए गए। कपाट बंद होने के इस पावन अवसर पर देश-विदेश से पहुंचे हजारों श्रद्धालु साक्षी बने और पूरा हेमकुंड क्षेत्र ‘जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के जयकारों से गूंज उठा।

​हेमकुंड साहिब कपाट बंद होने से जुड़ी मुख्य बातें:

​धार्मिक अनुष्ठान और प्रक्रिया:

​कपाट बंद होने की प्रक्रिया शनिवार सुबह 10 बजे सुखमनी साहिब के पाठ के साथ शुरू हुई। सुबह 11:15 बजे संतों ने शब्द-कीर्तन में भाग लिया।

​दोपहर 12:30 बजे मुख्य ग्रंथी हरमीर सिंह ने वर्ष की अंतिम अरदास की और पौने एक बजे यात्रा का अंतिम हुकमनामा लिया गया।

​दोपहर ठीक 1 बजे ‘पंज प्यारों’ की अगुवाई में श्री गुरु ग्रंथ साहिब को दरबार साहिब से सचखंड में सुरक्षित विराजमान किया गया।

​अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालुओं की उपस्थिति:

​इस वर्ष कपाट बंद होने के अवसर पर पाकिस्तान से आए 40 लोगों के जत्थे ने दरबार साहिब में मत्था टेका।

​इसके अलावा अमेरिका और इंग्लैंड से करीब 30 श्रद्धालु तथा फ्रांस से 7 सिख श्रद्धालु भी हेमकुंड साहिब पहुंचे। दिल्ली, पंजाब, उत्तराखंड, ओडिशा, मुंबई और हरियाणा से भी बड़ी संख्या में संगतें उपस्थित रहीं।

​सेना के बैंड की धुन और प्रसाद वितरण:

​सेना के मधुर बैंड की स्वर लहरियों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

​यात्रा के सफल संचालन के बाद घांघरिया गुरुद्वारे में संगत के लिए हलवा, दूध, पकौड़े और खिचड़ी का विशेष लंगर (प्रसाद) वितरित किया गया।

​लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट भी बंद:

​हेमकुंड साहिब के साथ ही पौराणिक मान्यता प्राप्त भगवान लक्ष्मण लोकपाल मंदिर के कपाट भी शनिवार को शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। मान्यता है कि भगवान लक्ष्मण ने पूर्व जन्म में हेमकुंड सरोवर के किनारे मानव कल्याण के लिए कठिन तपस्या की थी। भ्यूंडार घाटी के दर्जनों ग्रामीण

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