चीन से ईरान तक बैन, भारत में भी अटकी मंजूरी: एलन मस्क के स्टारलिंक पर क्यों टिकी है दुनिया की नजर?
चीन से ईरान तक बैन, भारत में भी अटकी मंजूरी: एलन मस्क के स्टारलिंक पर क्यों टिकी है दुनिया की नजर?
एलन मस्क के सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक को चीन से लेकर ईरान, रूस और उत्तर कोरिया जैसे कई देशों में पूरी तरह बैन कर दिया गया है। अब भारत में भी इसकी व्यावसायिक शुरुआत सुरक्षा चिंताओं के कारण अटकी हुई है। सवाल उठ रहा है—क्या भारत भी इन देशों की तरह राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है, या फिर यह सिर्फ नियामकीय देरी है?
किन देशों में बैन है स्टारलिंक?
स्टारलिंक की आधिकारिक उपलब्धता के आंकड़ों और रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन, हांगकांग, मकाओ, रूस, बेलारूस, उत्तर कोरिया, अफगानिस्तान और सीरिया में सेवा को पूरी तरह ब्लैकलिस्ट किया गया है। चीन इसे “राष्ट्रीय सुरक्षा खतरा” मानता है। विदेशी सैटेलाइट संचार पर सख्त प्रतिबंध है और चीनी जलक्षेत्र में जहाजों को भी टर्मिनल बंद करने का निर्देश है।
ईरान में भी स्थिति लगभग वैसी ही है। वहां स्टारलिंक का कब्जा और इस्तेमाल गैरकानूनी है। सरकार ने इसे अपराध घोषित किया है, टर्मिनलों की जब्ती की जा रही है और सिग्नल जैमिंग तक का सहारा लिया जा रहा है। फिर भी विरोध प्रदर्शनों और इंटरनेट ब्लैकआउट के दौरान हजारों स्मगल किए गए टर्मिनल इस्तेमाल होते रहे हैं।
इन देशों में मुख्य चिंता एक ही है—स्टारलिंक जैसी सेवा स्थानीय नियंत्रण से बाहर होती है। यह सेंसरशिप को बाईपास कर सकती है, डेटा विदेश में जा सकता है और भू-राजनीतिक तनाव के समय में नियंत्रण मुश्किल हो जाता है।
भारत में क्या स्थिति है?
भारत में स्टारलिंक को जीएमपीसीएस लाइसेंस मिल चुका है और आईएन-स्पेस की मंजूरी भी मिली है। कंपनी ने स्थानीय ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार कर लिया है। लेकिन सुरक्षा मूल्यांकन और स्पेक्ट्रम आवंटन जैसे अंतिम चरण अभी पूरे नहीं हुए हैं।
जून 2026 में बूमबर्ग रिपोर्ट के बाद यह बात सामने आई कि ईरान में स्टारलिंक टर्मिनलों के इस्तेमाल (खासकर संघर्ष के दौरान) को लेकर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने अतिरिक्त सावधानी बरतनी शुरू कर दी। गृह मंत्रालय के तहत सुरक्षा क्लियरेंस अभी लंबित है। सरकार का कहना है कि स्टारलिंक समेत तीनों लाइसेंसधारी कंपनियां (वनवेब और जियो सैटेलाइट समेत) लगभग एक ही नियामकीय चरण में हैं और सुरक्षा आकलन जारी है।
हाल ही में एलन मस्क ने भारत में देरी को लेकर “कुछ ओलिगार्क्स” पर आरोप लगाया था। भारत सरकार ने इसे “बेबुनियाद और गलत” करार दिया और कहा कि नियामकीय प्रक्रिया निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण है।
क्यों हो रही है इतनी सतर्कता?
विशेषज्ञों के अनुसार, स्टारलिंक की सबसे बड़ी ताकत ही उसकी कमजोरी बन जाती है। सैटेलाइट सीधे टर्मिनल से जुड़ते हैं, इसलिए पारंपरिक इंटरनेट शटडाउन का असर नहीं पड़ता। ईरान में यह साफ दिखा। भारत जैसे देश में जहां सीमा सुरक्षा, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर जैसे संवेदनशील इलाके हैं, वहां पूर्ण नियंत्रण सुनिश्चित करना जरूरी माना जा रहा है।
कंपनी का दावा है कि उसने भारत के लिए विशेष सुरक्षा मॉडल तैयार किया है और यूजर डेटा देश के अंदर ही रखा जाएगा। फिर भी अंतिम मंजूरी अभी बाकी है।
निष्कर्ष: चीन और ईरान जैसे देशों ने स्टारलिंक को पूरी तरह बंद कर दिया है। भारत ने अभी तक बैन नहीं किया है, लेकिन सुरक्षा शर्तों को पूरा किए बिना हरी झंडी भी नहीं दी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और डिजिटल कनेक्टिविटी के बीच संतुलन कैसे बैठता है।
(यह रिपोर्ट उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों और समाचार रिपोर्ट्स पर आधारित है।)

