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सैटकॉम लाइसेंस विवाद पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का बयान, भारत में एकाधिकार की अनुमति नहीं

सैटकॉम लाइसेंस विवाद पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का बयान, भारत में एकाधिकार की अनुमति नहीं

​सैटेलाइट संचार (सैटकॉम) सेवाओं को लेकर देश में जारी नियामक चर्चाओं और एलन मस्क के बयानों के बीच, केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शुक्रवार को स्पष्ट किया है कि भारत किसी भी क्षेत्र में एकाधिकार (Monopoly) की अनुमति नहीं देता है। इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 के इतर मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने यह बात कही।

​सैटकॉम लाइसेंस और केंद्रीय मंत्रियों के बयानों से जुड़ी मुख्य बातें:

​ज्योतिरादित्य सिंधिया का बयान: केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हाल ही में एक विशेष कंपनी को लेकर काफी चर्चाएं की जा रही हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि पहले ही तीन कंपनियों को सैटकॉम लाइसेंस प्रदान किए जा चुके हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी सैटेलाइट संचार सेवा प्रदाता राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं और निर्धारित मानकों को पूरी तरह से पूरा करने के बाद ही अपना परिचालन शुरू कर सकता है।

​कांग्रेस पर निशाना: राहुल गांधी द्वारा सोशल मीडिया पर एलन मस्क का बचाव किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए सिंधिया ने कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधा और कहा कि उन्हें यह भी नहीं पता कि वे “बाएं जा रहे हैं या दाएं।”

​गृह मंत्रालय से सुरक्षा मंजूरी का इंतजार: इससे पहले, संचार राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने स्पष्ट किया था कि भारत में सैटेलाइट संचार सेवाओं की व्यावसायिक शुरुआत फिलहाल गृह मंत्रालय (MHA) से सुरक्षा मंजूरी मिलने पर निर्भर है। उन्होंने बताया कि दूरसंचार विभाग (DoT) पहले ही सेवा प्रदाताओं को लाइसेंस और स्पेक्ट्रम से संबंधित अस्थायी मंजूरियां जारी कर चुका है, और जैसे ही सुरक्षा मूल्यांकन पूरा हो जाएगा, अंतिम मंजूरी दे दी जाएगी। इसका किसी एक विशिष्ट कंपनी के साथ भेदभाव से कोई लेना-देना नहीं है।

​भारत की डिजिटल प्रगति: मंत्री ने देश की तकनीकी प्रगति का जिक्र करते हुए बताया कि भारत में वर्तमान में 1.1 अरब ब्रॉडबैंड कनेक्शन हैं और देश के 99.9 प्रतिशत जिलों तक 5जी (5G) कवरेज की पहुंच सुनिश्चित की जा चुकी है। सरकार ने दोहराया है कि बाजार में प्रवेश की इच्छा रखने वाली सभी कंपनियों के लिए एक निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण नियामक व्यवस्था का पालन किया जा रहा है।

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