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CJP के प्रदर्शन से पहले दिल्ली में कड़ी सुरक्षा, 28 ट्रेनें रद्द और 57 मेट्रो स्टेशन बंद करने का आदेश

CJP के प्रदर्शन से पहले दिल्ली में कड़ी सुरक्षा, 28 ट्रेनें रद्द और 57 मेट्रो स्टेशन बंद करने का आदेश

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस और अर्धसैनिक बलों के हजारों जवानों की तैनाती के साथ रेल और मेट्रो सेवाओं पर भी असर पड़ने की जानकारी सामने आई है। दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। वहीं, देश के अलग-अलग हिस्सों से दिल्ली आ रहे प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के दावे भी किए गए हैं।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं मिली?

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने का ऐलान किया था। पार्टी ने अपने समर्थकों से बड़ी संख्या में दिल्ली पहुंचने की अपील भी की थी। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है।

नई दिल्ली की संयुक्त पुलिस आयुक्त नूपुर प्रसाद के मुताबिक, CJP की ओर से सौरव दास ने 7 अक्टूबर को प्रदर्शन की अनुमति के लिए आवेदन दिया था। पुलिस का कहना है कि निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार, ऐसे आयोजनों के लिए कम से कम 10 दिन पहले आवेदन करना जरूरी है, जबकि इस मामले में काफी कम समय पहले आवेदन किया गया।

पुलिस ने यह भी कहा कि पहले CJP को प्रदर्शन की अनुमति दिए जाने के दौरान तय कानूनी निर्देशों और आश्वासनों का पालन नहीं किया गया था। मौजूदा कानून-व्यवस्था, सार्वजनिक सुरक्षा और यातायात की स्थिति को देखते हुए इस बार अनुमति नहीं दी गई।

दिल्ली में 23 हजार से ज्यादा जवान तैनात

प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत की गई है। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, शहर में 23 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया गया है।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जंतर-मंतर पर किसी भी विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई है। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और पुलिसकर्मियों के साथ टकराव से बचने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि कानून का उल्लंघन करने, हिंसा करने या सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

इसके अलावा, नई दिल्ली के कुछ इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू की गई है, जिसके तहत संबंधित क्षेत्रों में निर्धारित प्रतिबंधों का पालन करना अनिवार्य होगा।

28 ट्रेनें रद्द, 57 मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश-निकास बंद

प्रदर्शन के मद्देनजर रेल और मेट्रो सेवाओं को लेकर भी प्रतिबंधों की जानकारी दी गई है। रेलवे के मुताबिक, 9 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे के बाद शुरुआती स्टेशन से रवाना होने वाली और 10 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच नई दिल्ली या हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पहुंचने वाली कुछ ट्रेनें रद्द की गई हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 28 ट्रेनों को रद्द किया गया है। इनमें मगध एक्सप्रेस, तेजस राजधानी एक्सप्रेस, संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस, अमृत भारत एक्सप्रेस, प्रयागराज एक्सप्रेस और यूपी संपर्क क्रांति एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें शामिल हैं।

वहीं, दिल्ली पुलिस के आदेश के मुताबिक, 9 अक्टूबर की रात 9 बजे से 57 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद रखने की व्यवस्था की गई है। प्रभावित स्टेशनों में राजीव चौक, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट, नई दिल्ली, पटेल चौक, जनपथ, मंडी हाउस, बाराखंबा रोड, आईटीओ, दिल्ली गेट, खान मार्केट, लोक कल्याण मार्ग, उद्योग भवन, कश्मीरी गेट, हौज खास, आईएनए और लाजपत नगर शामिल हैं।

इन प्रतिबंधों से यात्रियों को परेशानी हो सकती है। ऐसे में सफर से पहले संबंधित रेलवे और मेट्रो सेवाओं की आधिकारिक जानकारी जांचना जरूरी है।

इटारसी स्टेशन पर 15 CJP कार्यकर्ता हिरासत में

दिल्ली में प्रदर्शन से पहले मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के इटारसी रेलवे स्टेशन पर भी कार्रवाई की खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, गुरुवार देर शाम पुलिस ने CJP के 15 कार्यकर्ताओं को ट्रेन से उतारकर हिरासत में लिया। इनमें तीन युवतियां और 12 युवक शामिल बताए गए हैं।

ये कार्यकर्ता 10 अक्टूबर को दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जा रहे थे।

युवती से बदसलूकी का आरोप, पुलिस कार्रवाई पर सवाल

हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि ट्रेन में कार्रवाई के दौरान एक युवती के कपड़े खींचे गए और उस समय मौके पर कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी। कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें डराया-धमकाया गया और यह स्पष्ट नहीं किया गया कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में पुलिस का पक्ष सामने आने के बाद ही घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

अभिजीत दीपके ने पूछा- सरकार इमरजेंसी घोषित क्यों नहीं कर देती?

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की खबरों पर सरकार को घेरा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि प्रदर्शनकारियों को इस तरह रोका जा रहा है, तो सरकार आपातकाल घोषित क्यों नहीं कर देती?

दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा किया कि 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले देशभर में हजारों युवाओं को हिरासत में लिया गया है। उन्होंने कहा कि वह खुद दिल्ली पहुंचेंगे और परिस्थितियां कैसी भी हों, जंतर-मंतर तक मार्च करने की कोशिश करेंगे।

CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने भी कार्रवाई को लेकर सरकार की आलोचना की है।

AISF ने भी छात्रों को हिरासत में लेने का दावा किया

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) के राष्ट्रीय अध्यक्ष विराज दिवांग ने दावा किया कि पुणे से दिल्ली जा रहे संगठन के कुछ छात्रों को भी इटारसी में हिरासत में लिया गया है। उनके अनुसार, छात्र मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और चुनाव से जुड़े मुद्दों को लेकर होने वाले प्रदर्शन में भाग लेने जा रहे थे।

चुनाव आयोग को लेकर विरोध के बीच बढ़ा सियासी तनाव

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी सांसद भी पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे हैं। अब CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने के दावों ने राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया है।

एक ओर पुलिस कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा का हवाला देते हुए प्रतिबंधों को जरूरी बता रही है, वहीं प्रदर्शन से जुड़े संगठन कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं। अब नजर 10 अक्टूबर को दिल्ली में होने वाले घटनाक्रम पर है और यह देखना अहम होगा कि प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखते हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ी स्थिति को किस तरह संभालता है।

 

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