नेपाल में अगस्त 2026 की विनाशकारी बाढ़ से लगभग 2.7 अरब डॉलर का नुकसान, विश्व बैंक ने जारी की रिपोर्ट
नेपाल में अगस्त 2026 की विनाशकारी बाढ़ से लगभग 2.7 अरब डॉलर का नुकसान, विश्व बैंक ने जारी की रिपोर्ट
बीते 26 अगस्त को नेपाल में आई भयंकर बाढ़ और प्राकृतिक आपदा से देश को भारी आर्थिक और ढांचागत क्षति उठानी पड़ी है। विश्व बैंक द्वारा हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, इस आपदा से नेपाल को कुल 2.7 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 2.7 बिलियन डॉलर) का भारी नुकसान हुआ है, जिसमें भौतिक संपत्तियों का सीधा आर्थिक नुकसान लगभग 1.66 अरब अमेरिकी डॉलर आंका गया है।
विश्व बैंक की ‘नेपाल डेवलपमेंट अपडेट’ रिपोर्ट से जुड़ी मुख्य बातें:
बुनियादी ढांचे को सबसे ज्यादा मार: विश्व बैंक के ‘ग्लोबल रैपिड पोस्ट-डिजास्टर डैमेज एस्टिमेशन’ (GRADE) के अनुसार, कुल भौतिक नुकसान का 83 प्रतिशत हिस्सा (लगभग 1.38 अरब डॉलर) केवल बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को हुआ है। इसके अलावा, आवासीय भवनों को 185 मिलियन डॉलर (11 प्रतिशत) और गैर-आवासीय भवनों को 101 मिलियन डॉलर (6 प्रतिशत) का नुकसान पहुंचा है।
ऊर्जा और जलविद्युत क्षेत्र प्रभावित: भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई बाढ़ के कारण जलविद्युत परियोजनाओं, सौर ऊर्जा सुविधाओं, बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क और परिवहन व्यवस्था को भयंकर क्षति हुई है। आपदा की चपेट में 12 जलविद्युत परियोजनाएं और 1 सौर ऊर्जा परियोजना आईं, जिससे कुल प्रभावित क्षमता लगभग 430.7 मेगावाट रही। यह वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक नेपाल की कुल स्थापित जलविद्युत और सौर ऊर्जा क्षमता का लगभग 10.6 प्रतिशत है।
परिवहन और व्यापार गलियारे को क्षति: बाढ़ के कारण 82 किलोमीटर लंबे रसुवा व्यापार गलियारे (जो काठमांडू को चीन सीमा पर स्थित रसुवागढ़ी बॉर्डर से जोड़ता है) के 55 किलोमीटर से अधिक हिस्से को नुकसान पहुंचा है, जिसमें 40 किमी सड़क पूरी तरह तबाह हो गई है। इसके अलावा, 37 मोटर योग्य पुल और 68 झूला पुल भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।
सबसे ज्यादा प्रभावित जिले: विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, यह आपदा मुख्य रूप से मध्य नेपाल के तीन जिलों—रसुवा, नुवाकोट और धादिंग—तक केंद्रित रही। अकेले रसुवा में कुल सीधे नुकसान का लगभग 64 प्रतिशत (लगभग 1.07 अरब डॉलर) दर्ज किया गया, जबकि नुवाकोट में 551 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ।
जनहानि और लापता लोग: राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के आंकड़ों के मुताबिक, इस आपदा में 1,455 लोगों की जान जाने की पुष्टि हुई है, जबकि 5,285 लोग अभी भी लापता हैं। विश्व बैंक ने कहा है कि इस आपदा ने नेपाल के हिमालयी क्षेत्र में मौजूद जलवायु और भौगोलिक जोखिमों की जटिलता को उजागर किया है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्निर्माण की चुनौती बहुत बड़ी हो गई है।

