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तनुश्री दत्ता ने नाना पाटेकर को लेकर दिया तीखा बयान, ‘मीटू’ आंदोलन के दौर और कानूनी संघर्ष को किया याद

तनुश्री दत्ता ने नाना पाटेकर को लेकर दिया तीखा बयान, ‘मीटू’ आंदोलन के दौर और कानूनी संघर्ष को किया याद

​हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद, अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने उनके संबंध में एक कड़ा और तीखा बयान दिया है। आईएएनएस के साथ एक बातचीत के दौरान तनुश्री ने वर्ष 2018 के ‘मीटू’ (MeToo) आंदोलन के दौर को याद किया और उस कठिन समय में अपने संघर्ष, कानूनी लड़ाइयों तथा मानसिक परेशानियों के बारे में खुलकर बात की।

​तनुश्री दत्ता के बयान और पुराने विवाद से जुड़ी मुख्य बातें:

​कड़े शब्दों का इस्तेमाल: तनुश्री दत्ता ने नाना पाटेकर को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मेरे लिए तो वे ‘इविल डेड’ ही हैं। पिछले पांच साल में मैं जिस दौर से गुजरी हूं और जिन परेशानियों का सामना किया है, उसे कोई नहीं समझ सकता।” उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति इस तरह की परिस्थितियों से नहीं गुजरा, वह इसके दर्द को नहीं समझ सकता।

​केस वापस लेने के दबाव और धमकियां: अभिनेत्री ने आरोप लगाया कि मीटू मामले में कानूनी केस वापस लेने के लिए उन पर भारी दबाव डाला गया था। उन्हें लालच दिए गए और धमकियां मिलीं, लेकिन उन्होंने कभी समझौता नहीं किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें परेशान करने के लिए उनकी गाड़ी के साथ हादसे कराने और फूड पॉइजनिंग जैसी हरकतें की गईं।

​प्राइम विटनेस (गवाह) और केस बंद होने का जिक्र: तनुश्री ने दावा किया कि उनके मामले में मुख्य गवाह (हेयर ड्रेसर) को तैयार करने में उन्हें पांच साल का समय लग गया था, क्योंकि उस गवाह को भी लगातार धमकियां मिल रही थीं। उन्होंने कहा कि जिस दिन गवाह ने कोर्ट में आकर बयान दर्ज कराया और सच्चाई सामने आने वाली थी, उसी दिन कोर्ट ने केस बंद कर दिया।

​डिप्रेशन और मानसिक संघर्ष: अभिनेत्री ने बताया कि इस पूरे कानूनी और सामाजिक संघर्ष के दौरान वे डिप्रेशन (अवसाद) से गुजरीं। कभी निडर होकर घूमने वाली उनकी स्थिति ऐसी हो गई थी कि उन्हें घर से बाहर निकलने से पहले भी दस बार सोचना पड़ता था।

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