अन्तर्राष्ट्रीय

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में उठाई ‘सीसीआईटी’ को जल्द अपनाने की मांग, पहलगाम हमले के दोषियों पर कार्रवाई पर जोर

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में उठाई ‘सीसीआईटी’ को जल्द अपनाने की मांग, पहलगाम हमले के दोषियों पर कार्रवाई पर जोर

​भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए ‘अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन’ (CCIT) को जल्द से जल्द अपनाने की पुरजोर मांग की है। इसके साथ ही, भारत ने पहलगाम आतंकवादी नरसंहार के लिए जिम्मेदार सभी लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के महत्व पर भी विशेष जोर दिया है।

​भारत के बयान और मुख्य बिंदुओं से जुड़ी खास बातें:

​पहलगाम हमले के दोषियों पर जवाबदेही: महासभा की छठी समिति में बोलते हुए भाजपा सांसद और भारत के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य बिप्लब कुमार देब ने मंगलवार को कहा कि पिछले साल पहलगाम में हुए भीषण हमले, जिसमें 26 बेगुनाह नागरिकों की जान चली गई थी, के दोषियों, आयोजकों, फाइनेंसरों और प्रायोजकों को जवाबदेह ठहराना बेहद जरूरी है। गौरतलब है कि पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी।

​सीमापार आतंकवाद के खिलाफ अधिकार: भारत ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद का राज्य प्रायोजक है। पहलगाम हमले के बाद भारत ने अपनी सुरक्षा और अपने लोगों की रक्षा के अधिकार के तहत वहाँ संचालित आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई भी की थी।

​लगभग 30 साल से अटका सीसीआईटी: भारत द्वारा साल 1996 में प्रस्तावित सीसीआईटी को पिछले तीन दशकों से कुछ देशों द्वारा रोके रखा गया है। ये देश ‘अच्छे’ और ‘बुरे’ आतंकवादियों के बीच भेद करते हैं और ‘स्वतंत्रता सेनानियों’ को अलग श्रेणी में रखने का तर्क देते हैं। भारत ने दो टूक कहा है कि आतंकवाद में ‘अच्छा’ या ‘बुरा’ जैसा कोई अंतर नहीं हो सकता और नागरिकों को निशाना बनाने का कोई औचित्य नहीं हो सकता।

​आतंकवाद से निपटने की छह प्राथमिकताएं: भारत ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर निपटने के लिए अपनी छह प्रमुख प्राथमिकताएं साझा कीं:

​अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन (CCIT) को जल्द अपनाना।

​आतंकवादी वित्तपोषण को पूरी तरह समाप्त करना।

​आतंकवाद के पीड़ितों को केंद्र में रखना।

​राष्ट्रीय स्तर पर क्षमता निर्माण को मजबूत करना।

​आतंकवादी विचारधारा का कड़ा मुकाबला करना।

​आतंकवादियों के बुनियादी ढांचे को बाधित करना।

​भारत ने इस बात पर भी गहरी चिंता जताई कि आतंकवादी अब भर्ती, कट्टरपंथ, प्रोपेगैंडा और हमलों की योजना बनाने के लिए नई तकनीकों का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे निपटने के लिए वैश्विक कानूनी ढांचे को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *