चुनाव आयोग का आधिकारिक बयान: राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों की बैठक की मांग क्यों खारिज हुई?
चुनाव आयोग का आधिकारिक बयान: राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों की बैठक की मांग क्यों खारिज हुई?
दिल्ली में चुनाव आयोग (ECI) के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन, मार्च और मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात के प्रयास के बाद आखिरकार भारतीय निर्वाचन आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए एक आधिकारिक बयान जारी किया है। आयोग ने बताया कि आखिर किन कारणों से मंगलवार को यह हाई-प्रोफाइल मुलाकात संभव नहीं हो सकी और विपक्ष का प्रस्ताव क्यों खारिज करना पड़ा।
चुनाव आयोग के बयान से जुड़े मुख्य बिंदु:
समय मांगने की पूर्व प्रक्रिया का अभाव: आयोग ने स्पष्ट किया कि मंगलवार शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल या उनके प्रतिनिधियों ने आधिकारिक रूप से मीटिंग के लिए कोई पूर्व समय (Appointment) नहीं मांगा था। आयोग के अनुसार, 2025 में राजनीतिक दलों के साथ बैठकों के लिए एक तय प्रक्रिया निर्धारित की गई है, जिसके तहत आपसी सहमति से समय और तारीख तय होती है।
240 सांसदों के समूह का असामान्य प्रस्ताव: शाम करीब 4 बजे दिल्ली पुलिस के डीसीपी के जरिए सूचना मिली कि राहुल गांधी के नेतृत्व में 240 सांसदों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलना चाहता है और बैठक का प्रस्तावित स्थान संसद भवन ‘Annexe’ (एनेक्सी) तय किया गया है।
प्रोटोकॉल का हवाला और अस्वीकृति: निर्वाचन आयोग ने विचार किया कि प्रोटोकॉल के मुताबिक ऐसी मुलाकातें हमेशा भारत निर्वाचन आयोग के अपने परिसर में होती हैं। इस लिहाज से 240 सांसदों के साथ बाहर बैठक करने का अनुरोध असामान्य था, जिसे आयोग द्वारा स्वीकार नहीं किया जा सकता था।
आयोग का वैकल्पिक और अभूतपूर्व प्रस्ताव: स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ECI ने एक बड़ा कदम उठाने का प्रस्ताव दिया। आयोग ने कहा कि सांसदों का ज्ञापन स्वीकार करने के लिए उनके सबसे वरिष्ठ कार्यरत अधिकारी को स्वंय बैठक स्थल पर भेजने का विकल्प दिया गया था, जो कि अपने आप में एक अभूतपूर्व कदम होता।
सांसदों द्वारा प्रस्ताव खारिज: आयोग के मुताबिक, उनके इस वैकल्पिक प्रस्ताव को भी माननीयों सांसदों द्वारा अस्वीकार कर दिया गया।
अंत में, चुनाव आयोग ने दोहराया कि वह देश की संसदीय और लोकतांत्रिक परंपराओं के साथ-साथ अपने स्वयं के संस्थागत प्रोटोकॉल का सम्मान करता है। आयोग ने स्पष्ट किया कि कोई भी राजनीतिक दल विधिवत प्रक्रिया का पालन कर कभी भी मिलने का अनुरोध कर सकता है, जिस पर अनुकूलता के अनुसार विचार किया जाता है।

