प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण की मौत मामले में फोरेंसिक जांच पर टिकी पुलिस की नजरें, ड्रग्स एंगल से हो रही है तफ्तीश
प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण की मौत मामले में फोरेंसिक जांच पर टिकी पुलिस की नजरें, ड्रग्स एंगल से हो रही है तफ्तीश
वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के गुरु कृपा कुंज आश्रम में उनके शिष्य रसिक दुलारी शरण की रहस्यमयी मौत का मामला लगातार गहराता जा रहा है। 25 सितंबर की सुबह आश्रम की चौथी मंजिल से गिरकर हुई उनकी मौत के मामले में मथुरा पुलिस अब हर पहलू से जांच कर रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या घटना से पहले रसिक दुलारी ने किसी खतरनाक ड्रग्स या नशीले पदार्थ का सेवन किया था, जिसके कारण उन्हें गंभीर चोट और भारी रक्तस्राव के बावजूद दर्द का अहसास नहीं हुआ?
मामले से जुड़े मुख्य और चौंकाने वाले बिंदु:
गंभीर चोट और सामान्य व्यवहार: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया है कि रसिक दुलारी का आधा प्राइवेट पार्ट कमरे में मिली कटर ग्राइंडर मशीन से कटा हुआ था। शरीर से भारी मात्रा में खून बहने के बावजूद, सीसीटीवी फुटेज में वे बेहद सामान्य तरीके से खून से सने कपड़ों में सीढ़ियां चढ़कर चौथी मंजिल पर जाते हुए दिखाई दिए। उनके चेहरे पर दर्द का कोई भाव नहीं था, वे थोड़ी देर बैठे, लेटे और फिर अचानक नीचे कूद गए।
टॉक्सिकोलॉजी और फोरेंसिक जांच: मेडिकल और पुलिस विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक दर्द और रक्तस्राव के बाद सामान्य अवस्था में रहना तभी संभव है जब शरीर की चेतना या दर्द महसूस करने की क्षमता सुन्न हो गई हो। इसी गुत्थी को सुलझाने के लिए पुलिस ने उनके ब्लड सैंपल को फोरेंसिक और टॉक्सिकोलॉजी लैब भेजा है ताकि यह पता चल सके कि शरीर में कोई साइकोएक्टिव ड्रग या नशीला पदार्थ था या नहीं।
आश्रम की सुरक्षा और व्यवस्था पर सवाल: यदि फोरेंसिक रिपोर्ट में ड्रग्स की पुष्टि होती है, तो यह सवाल उठ खड़ा होगा कि आश्रम के भीतर इस तरह के प्रतिबंधित नशीले पदार्थ कैसे पहुंचे और क्या इसके पीछे कोई गुप्त नेटवर्क सक्रिय है। हालांकि, आश्रम में ड्रग्स के इस्तेमाल को लेकर अभी तक पुलिस या किसी आधिकारिक स्रोत ने पुष्टि नहीं की है।
साजिश की आशंका और सुरक्षा की मांग: इस घटना के बाद वृंदावन के साधु-संतों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर प्रेमानंद महाराज के लिए ‘जेड प्लस’ सुरक्षा की मांग की है। संतों का आरोप है कि आश्रम के भीतर कुछ गुटबाजी और जमीन से जुड़े विवादों के चलते इस पूरी घटना के पीछे किसी गहरी साजिश से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल मथुरा पुलिस सीसीटीवी फुटेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आने वाली विसरा/टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट के आधार पर इस हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील मामले की हर कड़ी को जोड़ने में जुटी है।

