SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग पर विपक्ष के विरोध प्रदर्शन पर सीएम धामी का पलटवार: “यह सिर्फ एक बहाना है, दाल में कुछ काला है”
SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग पर विपक्ष के विरोध प्रदर्शन पर सीएम पुष्कर सिंह धामी का पलटवार: “यह सिर्फ एक बहाना है, दाल में कुछ काला है”
देशभर में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर मंगलवार को विपक्षी दलों के सांसदों ने दिल्ली में जोरदार मार्च निकाला। संसद भवन परिसर से शुरू हुआ यह मार्च निर्वाचन आयोग मुख्यालय की ओर बढ़ा, जिसके मद्देनजर सेंट्रल दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम और विपक्ष के प्रदर्शन पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने विपक्ष के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक ढकोसला करार दिया है।
सीएम पुष्कर सिंह धामी के बयान के मुख्य बिंदु:
चुनाव आयुक्त के कार्यकाल से पहले भी जीत रही थी एनडीए: सीएम धामी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार पिछले साल (फरवरी 2025) ही मुख्य चुनाव आयुक्त बने हैं, लेकिन उससे पहले भी बीजेपी और एनडीए देश के विभिन्न राज्यों में लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं। ऐसे में विपक्ष के पास हार छिपाने के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है।
एसआईआर कोई नई प्रक्रिया नहीं: सीएम ने स्पष्ट किया कि देश में एसआईआर की प्रक्रिया कोई पहली बार नहीं हो रही है, इससे पहले भी यह प्रक्रिया करीब 20 बार हो चुकी है, तब कभी इस तरह की आपत्तियां दर्ज नहीं कराई गईं।
घुसपैठियों और फर्जी मतदान पर सवाल: सीएम धामी ने कड़े शब्दों में सवाल उठाया कि क्या देश में घुसपैठियों को मतदान का अधिकार मिलना चाहिए? क्या उन लोगों को वोट देने का हक होना चाहिए जिनके नाम एक से ज्यादा राज्यों की वोटर लिस्ट में दर्ज हैं? उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के शुद्धिकरण और गलत चीजों को रोकने के लिए यह पारदर्शी प्रक्रिया चलाई जा रही है, जिस पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
”दाल में कुछ काला है”: मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि अगर इस शुद्धिकरण अभियान से किसी को आपत्ति है, तो इससे साफ जाहिर होता है कि “दाल में कुछ काला है”, क्योंकि ये लोग ऐसे तत्वों के सहारे चुनाव को प्रभावित करते आए हैं।
संवैधानिक संस्थाओं पर हमला: सीएम धामी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि वे कभी ईवीएम पर हार का ठीकरा फोड़ते हैं, तो कभी चुनाव आयोग और प्रशासनिक मशीनरी पर सवाल खड़े करते हैं। देश में शायद ही कोई ऐसी संवैधानिक संस्था बची हो, जिस पर विपक्ष ने उंगली न उठाई हो। उन्होंने कहा कि देश संविधान, विधि और व्यवस्था से चलता है, हुड़दंगबाजी से नहीं।
विपक्ष द्वारा वोटर लिस्ट में पारदर्शिता और एसआईआर प्रक्रिया पर उठाए जा रहे सवालों के बीच राजनीतिक माहौल लगातार गरमाया हुआ है।

