संजय दत्त के ‘भारत में शांति’ वाले बयान पर सियासत तेज: नाना पटोले और परिणय फुके के बीच तीखी बयानबाजी, अभिनेता को देनी पड़ी सफाई
संजय दत्त के ‘भारत में शांति’ वाले बयान पर सियासत तेज: नाना पटोले और परिणय फुके के बीच तीखी बयानबाजी, अभिनेता को देनी पड़ी सफाई
प्रसिद्ध अभिनेता संजय दत्त के हालिया एक बयान को लेकर देश की राजनीति में तेज बहस छिड़ गई है। गांधी जयंती के मौके पर शेखर सुमन के टॉक शो ‘शेखर टूनाइट’ में शिरकत करते हुए संजय दत्त ने कहा था कि उन्हें अब देश में पहले जैसी शांति महसूस नहीं होती। इस बयान के वायरल होने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, जिसके बाद अभिनेता को खुद इस पर स्पष्टीकरण देना पड़ा है।
नेताओं की प्रतिक्रियाएं और बयानबाजी:
कांग्रेस का समर्थन: महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता नाना पटोले ने संजय दत्त के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि अभिनेता ने बिल्कुल सच कहा है। उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में दिनदहाड़े हत्याएं हो रही हैं और लोग खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। सरकारों को इस पर संज्ञान लेकर गुंडई रोकने के कदम उठाने चाहिए।
भाजपा का तीखा पलटवार: वहीं, भाजपा नेता परिणय फुके ने संजय दत्त पर बेहद तीखा हमला बोलते हुए कहा कि शायद अभिनेता अपना होश खो चुके हैं और उन्हें पाकिस्तान या यरवदा जेल में शांति महसूस हो रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उम्र को देखते हुए उन्हें शांति के लिए चार धाम की यात्रा करनी चाहिए और यदि उन्हें भारत में शांति नहीं मिल रही है, तो वे पाकिस्तान जा सकते हैं।
शिवसेना (यूबीटी) की असहमति: शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने भी संजय दत्त के बयान से असहमति जताई। उन्होंने कहा कि पूरा देश जानता है कि भारत में शांति है और देश एक बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रहा है। हर मुद्दे पर राजनीति करना ठीक नहीं है।
क्या था पूरा मामला और संजय दत्त की सफाई?
शो के दौरान संजय दत्त ने कहा था, “इस देश के लोग बहुत प्यारे हैं। यहां शांति होनी चाहिए। मुझे अब हमारे देश में वो शांति महसूस नहीं होती। हम भारतीय बड़े दिल वाले और मेहमाननवाज होते हैं।”
बयान के तूल पकड़ने और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आने के बाद संजय दत्त ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर सफाई दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
किसी भी व्यक्ति, समुदाय या संस्था की भावनाओं को ठेस पहुंचाना उनका उद्देश्य नहीं था।
उनकी टिप्पणियां एक स्क्रिप्टेड बातचीत के संदर्भ में थीं, जिसका मकसद केवल मजाकिया माहौल बनाना और ‘मुन्नाभाई’ की ‘गांधीगिरी’ के जरिए प्रेम व सद्भावना का संदेश देना था।
दुर्भाग्यवश, उनकी बातों को उनके मूल संदर्भ से अलग तरीके से समझ लिया गया।

