उत्तराखंड

‘श्रद्धा सम्मान लोकपितृ स्मरण समारोह-2026’: उत्तराखंड की लोक संस्कृति और दिवंगत कलाकारों को दी गई श्रद्धांजलि

‘श्रद्धा सम्मान लोकपितृ स्मरण समारोह-2026’: उत्तराखंड की लोक संस्कृति और दिवंगत कलाकारों को दी गई श्रद्धांजलि

​देहरादून में ‘आवाज सुनो पहाड़ों की’ मंच की ओर से आयोजित ‘श्रद्धा सम्मान लोकपितृ स्मरण समारोह-2026’ का समापन हुआ। समारोह के तीसरे दिन महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए दिवंगत लोक कलाकारों को श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके परिजनों को सम्मानित किया।

​समारोह की मुख्य बातें और विचार:

​पहाड़ की आत्मा और बोलियां: भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी और नेपाली बोलियों में केवल संवाद नहीं, बल्कि देवत्व और पहाड़ की आत्मा बसती है। संस्कृति का उद्गम पर्वतों से हुआ है, इसलिए अपनी लोक परंपराओं को बचाना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।

​दिल्ली में भाषा शिक्षण की पहल: उन्होंने याद किया कि जब वे सांसद थे, तब दिल्ली में गढ़वाली और कुमाऊंनी भाषा सिखाने की पहल की गई थी, जो आज भी जारी है। उन्होंने गांवों को मजबूत बनाने और ‘रिवर्स माइग्रेशन’ पर जोर देते हुए कहा कि भाषा और संस्कृति का संरक्षण समाज की सक्रिय भागीदारी के बिना संभव नहीं है।

​दिग्गज वक्ताओं के विचार: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि लोक कलाकारों को स्थायी मंच और आर्थिक सहयोग देने की नीति बननी चाहिए। वहीं, भाजपा प्रदेश महामंत्री दीप्ति रावत भारद्वाज ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन व रोजगार से जोड़ते हुए कलाकारों को प्रोत्साहित कर रही है। कार्यक्रम संयोजक नरेंद्र रौथाण और अधिवक्ता संजय शर्मा दरमोड़ा ने भी लोक संस्कृति के संरक्षण पर अपने विचार रखे।

​दिवंगत लोक कलाकारों के परिजनों का सम्मान:

समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले दिवंगत लोक कलाकारों और साहित्यकार के परिजनों को सम्मानित किया गया:

​गीत-संगीत क्षेत्र: दीवान कनवाल, गुंजन डंगवाल, भगवती प्रसाद पोखरियाल और पंडित केशव राम के परिजन।

​फिल्म एवं नाट्य क्षेत्र: गीता उनियाल और जयपाल नेगी के परिजन।

​भाषा-साहित्य क्षेत्र: चारू चंद्र चंदोला और हरिदत्त भट्ट ‘शैलेश’ के परिजन।

​विशेष योगदान: कमलेश नेगी और सूचना विभाग से सुरेश चंद्र भट्ट को भी सम्मानित किया गया।

​कार्यक्रम का संचालन सुनील सजवाण ने किया, जबकि अंत में संयोजक नरेंद्र रौथाण ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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