राहुल गांधी और कांग्रेस ने शुरू की नई पहल ‘सत्याग्रह’: देशभर के संघर्षों को डिजिटल मैप पर जोड़कर बुलंद होगी आवाज
राहुल गांधी और कांग्रेस ने शुरू की नई पहल ‘सत्याग्रह’: देशभर के संघर्षों को डिजिटल मैप पर जोड़कर बुलंद होगी आवाज
देश के विभिन्न हिस्सों में अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे नागरिकों और समूहों को एक साझा मंच पर एकजुट करने के उद्देश्य से कांग्रेस पार्टी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ‘सत्याग्रह’ नामक एक नया राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है। गांधी जयंती के संदर्भ में शुरू की गई इस पहल का मुख्य नारा ‘संघर्ष जोड़ो, भारत जोड़ो’ रखा गया है।
क्या है ‘सत्याग्रह’ अभियान और इसके मुख्य उद्देश्य?
डिजिटल मैप पर संघर्ष: इस पहल के तहत देश के किसी भी कोने में अन्याय या अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे लोग अपनी समस्याओं, आंदोलनों और संघर्षों की जानकारी एक ऑनलाइन मंच (सत्याग्रह वेबसाइट) पर साझा कर सकेंगे। इन कहानियों और आंदोलनों को एक डिजिटल मैप पर प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे यह पता चल सकेगा कि देश के अन्य हिस्सों में समान मुद्दों पर कौन-कौन संघर्ष कर रहा है।
आवाज़ को मजबूती देना: राहुल गांधी का मानना है कि अक्सर लोग अपने स्तर पर अकेले संघर्ष करते हैं और उनकी आवाज दब जाती है। ऐसे में छात्रों, युवाओं, किसानों, आदिवासियों, दलितों, महिलाओं और अन्य समुदायों के संघर्षों को एक मंच पर लाकर उनकी ताकत को बढ़ाना इस अभियान का मुख्य मकसद है।
संवैधानिक जिम्मेदारी: राहुल गांधी ने इसे अपनी लोकतांत्रिक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष के रूप में जहाँ भी सत्य को दबाया जा रहा है, वहाँ लोगों की मदद करना और उनके साथ खड़े होना उनका कर्तव्य है।
कांग्रेस पार्टी का रुख और भागीदारी की अपील
कांग्रेस पार्टी ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा है कि वर्तमान में देश में जमीन के अधिकार, महिलाओं के अधिकार, दलित-पिछड़ा वर्ग के हक, शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर लोग लगातार आवाज उठा रहे हैं।
पार्टी ने देशवासियों से सत्याग्रह पोर्टल पर जाकर अपने आंदोलनों की जानकारी दर्ज करने की अपील की है।
जानकारी साझा करने के बाद पार्टी स्तर पर उन लोगों से संपर्क किया जाएगा, उनकी बात सुनी जाएगी और सत्य तथा न्याय की इस लड़ाई में हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।
महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और जनभागीदारी के सिद्धांतों से प्रेरित यह अभियान स्थानीय स्तर के संघर्षों को राष्ट्रीय फलक पर लाने और लोकतांत्रिक संवाद को और अधिक मजबूत करने का प्रयास माना जा रहा है।
