अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप: ईरान संघर्ष जल्द थमेगा, दक्षिण कोरिया को अलास्का पाइपलाइन पर दी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप: ईरान संघर्ष जल्द थमेगा, दक्षिण कोरिया को अलास्का पाइपलाइन पर दी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ईरान के साथ चल रहे तनाव और ऊर्जा बाजार से जुड़े कई अहम मुद्दों पर खुलकर बात की। इसके साथ ही उन्होंने अलास्का पाइपलाइन प्रोजेक्ट को लेकर दक्षिण कोरिया को सख्त चेतावनी भी दी है।
ईरान को लेकर क्या बोले डोनाल्ड ट्रंप?
अगले कदम पर चुप्पी: जब ट्रंप से पूछा गया कि ईरान को लेकर उनका अगला कदम क्या होगा, तो उन्होंने इसका खुलासा करने से इनकार कर दिया और कहा, “अगर मैं आपको बता दूं, तो आपके पास बहुत बड़ी खबर होगी, लेकिन आपको जल्द पता चल जाएगा।”
जल्द खत्म होगा संघर्ष: ट्रंप ने दावा किया कि ईरान से जुड़े हालात ज्यादा लंबे समय तक नहीं चलेंगे और बहुत जल्द स्थिति सामान्य हो जाएगी।
तेल की कीमतें होंगी कम: उन्होंने अनुमान जताया कि ईरान का मामला सुलझते ही तेल की कीमतें फिर से पुराने स्तर पर आ जाएंगी, और हो सकता है कि उनके कार्यकाल की शुरुआत में जो कीमतें थीं, उससे भी नीचे चली जाएं।
डीजल निर्यात और यूरोप की भूमिका
डीजल की उपलब्धता और अमेरिकी निर्यात पर रोक के सवाल पर ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिका डीजल के निर्यात पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाने जा रहा है।
उन्होंने बताया कि यूरोप दुनिया के बाकी हिस्सों के मुकाबले ज्यादा डीजल का इस्तेमाल करता है और उनकी अपील पर यूरोपीय देशों ने बाजार में अतिरिक्त डीजल उपलब्ध कराने में बहुत अच्छा सहयोग किया है।
दक्षिण कोरिया को अलास्का पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर चेतावनी
अलास्का पाइपलाइन प्रोजेक्ट को लेकर दक्षिण कोरिया की ओर से अभी तक मंजूरी न मिलने पर ट्रंप का रुख काफी सख्त नजर आया।
जब एक पत्रकार ने बताया कि सोल (दक्षिण कोरिया की राजधानी) ने अभी तक इस प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं दी है और वह विचार कर रहा है, तो ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा, “उन्हें बता दो कि अगर उन्होंने जल्द साइन नहीं किया, तो मैं इसे दोगुना कर दूंगा।”
हालांकि, ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किस कीमत या रकम को दोगुना करने की बात कर रहे थे और न ही इसके लिए कोई समयसीमा तय की।
अलास्का एलएनजी प्रोजेक्ट: इस प्रोजेक्ट के तहत अलास्का के नॉर्थ स्लोप से प्राकृतिक गैस को पाइपलाइन के जरिए दक्षिणी हिस्से में स्थित एलएनजी फैसिलिटी तक पहुँचाया जाना है, जहाँ से इसे एलएनजी में बदलकर एशियाई देशों सहित विदेशों में निर्यात किया जा सके।

