जयशंकर की चेतावनी: दुनिया के सामने ‘4F’ संकट, चीन के साथ रिश्तों पर भी बोले
जयशंकर की चेतावनी: दुनिया के सामने ‘4F’ संकट, चीन के साथ रिश्तों पर भी बोले
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में वैश्विक व्यवस्था में बढ़ते तनाव के बीच भोजन, ईंधन, खाद और वित्त यानी ‘4F’ से जुड़े संकटों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सप्लाई चेन, ऊर्जा बाजार और विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ता है।
जयशंकर ने चेतावनी दी कि अनाज की सप्लाई में रुकावट और खाद के उत्पादन पर असर आने वाले महीनों में बड़े खाद्य संकट का जोखिम बढ़ा सकता है। उन्होंने ऊर्जा आपूर्ति को भी बड़ी चुनौती बताया और कहा कि तेल की सप्लाई से जुड़े राजनीतिक फैसलों का असर कीमतों और वैश्विक स्थिरता पर पड़ सकता है।
विदेश मंत्री के मुताबिक, संघर्ष के दौरान पूंजी अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाने वाले बाजारों की ओर जा सकती है, जिससे विकासशील देशों पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि भोजन, ईंधन, खाद और वित्त से जुड़ी समस्याएं एक-दूसरे से जुड़ी हैं और कमजोर अर्थव्यवस्थाओं के लिए किसी नए आर्थिक झटके से निपटना मुश्किल हो सकता है।
जयशंकर ने कहा कि देशों को अपनी नीतियां बनाते समय उनके दूसरे देशों पर पड़ने वाले प्रभाव को भी ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक सुरक्षित और विविध बनाने तथा बहुपक्षीय संस्थाओं को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।
बदलती वैश्विक व्यवस्था पर क्या बोले जयशंकर?
जयशंकर ने कहा कि दुनिया अधिक प्रतिस्पर्धी और बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। उनके मुताबिक, अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा और बदलते व्यापारिक समीकरणों के बीच कई देश अपने जोखिम कम करने, साझेदारियों में विविधता लाने और आपूर्ति व्यवस्था को सुरक्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में देशों के बीच प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ आर्थिक निर्भरता भी बनी हुई है। ऐसे में व्यापार, वित्त, यात्रा और बाजार तक पहुंच जैसे क्षेत्रों को दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल किए जाने की आशंका बढ़ती है। जयशंकर ने इस बदलते माहौल को देखते हुए भारत की विदेश नीति को कई साझेदारियों के बीच संतुलन बनाने वाली रणनीति के रूप में बताया।
उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका, यूरोप, जापान, चीन, रूस, खाड़ी देशों, आसियान और ग्लोबल साउथ के साथ अपने संबंधों को अपने हितों के अनुसार आगे बढ़ाएगा। जयशंकर ने कहा कि वह दुनिया को लेकर निराशावादी नहीं हैं और उम्मीद है कि प्रतिस्पर्धा के बावजूद देश नए समझौते और सहयोग के रास्ते तलाशेंगे।
चीन के साथ रिश्तों पर भी दिया बड़ा बयान
जयशंकर ने भारत-चीन संबंधों पर कहा कि दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव कम होने के बाद संपर्कों में धीरे-धीरे सुधार आया है। उन्होंने कहा कि 2020 से 2024 के बीच दोनों देशों के रिश्ते मुश्किल दौर से गुजरे और सीमा की स्थिति का द्विपक्षीय संबंधों पर सीधा असर पड़ा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमा पर शांति और स्थिरता भारत-चीन संबंधों को सामान्य बनाने के लिए जरूरी है। जयशंकर के अनुसार, सीमा की स्थिति ही बड़े पैमाने पर दोनों देशों के रिश्तों की स्थिति को प्रभावित करती है। हाल के महीनों में उड़ानों, वीजा और अन्य संपर्कों में हुई बहाली को उन्होंने रिश्तों में स्थिरता की दिशा में उठे कदमों के रूप में बताया, लेकिन इसे सभी विवादों के समाधान के तौर पर पेश नहीं किया।
जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन के बीच बेहतर संबंध दोनों देशों के हित में हैं, लेकिन इसके लिए सीमा से जुड़े मुद्दों पर लगातार काम करना होगा। उन्होंने कहा कि भारत अपने हितों को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक समाधान तलाशता रहेगा।
विदेश मंत्री की ये टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं जब अमेरिका-चीन संबंधों, व्यापारिक नीतियों और वैश्विक संघर्षों के बीच कई देश अपनी विदेश और आर्थिक रणनीतियों को नए सिरे से तैयार कर रहे हैं।
