विश्व हृदय दिवस: महत्व, इतिहास और मानव हृदय से जुड़े प्रमुख तथ्य
विश्व हृदय दिवस: महत्व, इतिहास और मानव हृदय से जुड़े प्रमुख तथ्य
आज (29 सितंबर) विश्व हृदय दिवस (World Heart Day) है। दुनियाभर में दिल से जुड़ी बीमारियों (कार्डियोवैस्कुलर डिजीज) के बढ़ते खतरे और उनके प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल इस दिन को विशेष रूप से मनाया जाता है।
मानव हृदय और इस दिवस से जुड़े मुख्य बिंदु:
मानव हृदय की संरचना और कार्य:
आकार और वजन: हृदय का आकार एक बंद मुट्ठी जैसा और वजन लगभग 250 से 350 ग्राम होता है। यह छाती के मध्य में फेफड़ों के बीच और थोड़ा बाईं ओर स्थित होता है।
भाग: दिल चार भागों में बंटा होता है—ऊपर के दो हिस्से आलिंद (Atrium) और नीचे के दो हिस्से निलय (Ventricle) कहलाते हैं।
कार्य: इसका मुख्य काम शरीर के सभी अंगों तक ऑक्सीजन और पोषक तत्वों से युक्त रक्त पहुंचाना तथा कार्बन डाइऑक्साइड को फेफड़ों तक भेजना है ताकि वह शरीर से बाहर निकल सके। एक स्वस्थ वयस्क का दिल आराम की स्थिति में प्रति मिनट लगभग 70 से 80 बार धड़कता है।
हृदय रोगों के आंकड़े (वैश्विक और भारतीय संदर्भ):
दुनिया भर में हृदय रोग मृत्यु का सबसे बड़ा कारण बने हुए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हर साल लगभग 1.98 से 2 करोड़ लोगों की समय पूर्व मौत हृदय रोगों के कारण होती है।
वहीं, अकेले भारत में दिल की बीमारियों से होने वाली मौत का आंकड़ा प्रति वर्ष 28.6 से 31.6 लाख के बीच है।
विश्व हृदय दिवस का इतिहास:
विश्व स्तर पर हृदय दिवस मनाने का विचार डब्ल्यूएचओ के पूर्व अध्यक्ष एंटोनी बेई डी लूना ने दिया था, जिसके बाद डब्ल्यूएचओ के सहयोग से 1999 में इसकी स्थापना की गई।
दुनिया में पहली बार आधिकारिक तौर पर यह दिवस 24 सितंबर 2000 को मनाया गया था। वर्ष 2011 तक यह सितंबर के अंतिम रविवार को मनाया जाता था, लेकिन 2012 से इसे हर साल 29 सितंबर को मनाया जाने लगा।
इस वर्ष की थीम:
इस वर्ष विश्व हृदय दिवस का थीम “डोंट मिस ए बीट” (दिल की धड़कन को न चूकें) है, जबकि पिछले वर्ष का थीम “यूज हार्ट फॉर एक्शन” (कार्यों के लिए हृदय का उपयोग करें) था।
इस दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को हृदय रोगों के प्रति शिक्षित करना, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना और दिल की सेहत से जुड़ी सावधानियों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।
