सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को निर्देश: टीएमसी नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर तय करे व्यावहारिक समय-सीमा
सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को निर्देश: टीएमसी नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर तय करे व्यावहारिक समय-सीमा
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को भारत के चुनाव आयोग (ECI) को निर्देश दिया है कि वह तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद का निपटारा करने के लिए एक व्यावहारिक समय-सीमा (टाइमफ्रेम) तय करे। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले को अनिश्चित काल तक नहीं खींचा जाना चाहिए, ताकि दोनों पक्षों को अपने सबूत पेश करने का निष्पक्ष मौका मिल सके और कार्यवाही बेवजह लंबी न हो।
मामले की मुख्य बातें और कोर्ट की कार्यवाही
याचिका और बेंच: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची तथा जस्टिस वी. मोहना की बेंच टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में ईसीआई के उस अंतरिम फैसले को चुनौती दी गई है जिसके तहत पार्टी के नाम और ‘फूल और घास’ वाले चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया गया है।
समय-सीमा तय करने के निर्देश: सीजेआई की अगुवाई वाली बेंच ने चुनाव आयोग के वकील से कहा, “हमें एक उचित समय-सीमा बताएं जिसमें पार्टियों को सबूत पेश करने का निष्पक्ष मौका मिले, लेकिन मामला लंबा न खिंचे और आपको भी सोचने-समझने के लिए पर्याप्त समय मिले। कुछ व्यावहारिक होना चाहिए।” इस मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।
वकीलों के प्रमुख तर्क
ममता बनर्जी का पक्ष (कपिल सिब्बल): वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि विवाद जुलाई में ही आयोग के सामने आ गया था, लेकिन पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज करने का आदेश उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के ठीक बीच में लिया गया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को चुनाव की घोषणा से पहले फैसला लेना चाहिए था। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि इस विवाद का निपटारा अक्टूबर तक हो जाना चाहिए क्योंकि उसके बाद कोलकाता नगर निगम समेत स्थानीय निकाय चुनाव होने हैं।
विरोधी गुट का पक्ष (मुकुल रोहतगी और नीरज किशन कौल): ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले विरोधी गुट की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि वे ईसीआई के सामने कार्यवाही में पूरा सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन तथ्यों के जटिल सवालों को देखते हुए केवल 10 या 20 दिनों की समय-सीमा तय करना व्यावहारिक नहीं होगा। उन्होंने तर्क दिया कि ईसीआई के पास चुनाव चिह्न आदेश, 1968 के पैराग्राफ 15 और 18 के तहत अंतरिम निर्देश जारी करने की व्यापक शक्तियां हैं।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब विरोधी गुटों ने टीएमसी के संगठनात्मक और विधायी ढांचे पर अपना दावा जताते हुए चुनाव आयोग का रुख किया था। आयोग ने अपने अंतरिम आदेश में दोनों गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया था।
अंतरिम आवंटन: 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों के लिए ईसीआई ने ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चिह्न दिया है, जबकि ऋतब्रत बनर्जी के गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ और ‘लिफाफा’ चिह्न आवंटित किया गया है।
संसदीय और दलबदल विवाद: यह संगठनात्मक विवाद संसद तक भी पहुंच चुका है, जहां टीएमसी के बागी सांसदों द्वारा अलग संसदीय समूह के दावे और दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता याचिकाओं पर भी चर्चा चल रही है। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में 28 सितंबर को अगली सुनवाई करेगा।
