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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग: कानूनी रूप से क्यों नहीं है संभव?

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग: कानूनी रूप से क्यों नहीं है संभव?

नई दिल्ली: चुनाव आयोग के अंदर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के खुलासे के बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तत्काल गिरफ्तारी और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग तेज कर दी है। अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी और उद्धव ठाकरे समेत कई नेताओं ने उन्हें जेल भेजने की बात कही है। लेकिन कानूनी विशेषज्ञों और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को इस तरह गिरफ्तार करना लगभग असंभव है।

संविधान की मजबूत सुरक्षा

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के जज के समान सुरक्षा प्राप्त है। उन्हें सिर्फ सिद्ध दुर्व्यवहार या अक्षमता के आधार पर ही पद से हटाया जा सकता है। हटाने की प्रक्रिया संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से प्रस्ताव पास होने और राष्ट्रपति के आदेश के बाद ही पूरी होती है। सरकार या पुलिस अकेले इस पद पर बैठे व्यक्ति को न तो हटा सकती है और न ही सीधे गिरफ्तार कर सकती है।

2023 के कानून की धारा 16 सबसे बड़ी बाधा

मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 16 सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान है। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कोई भी अदालत CEC या चुनाव आयुक्त के खिलाफ उनके आधिकारिक कर्तव्य के दौरान किए गए किसी काम या दिए गए बयान के लिए दीवानी या आपराधिक कार्यवाही शुरू या जारी नहीं रख सकती।

विपक्ष जिन मुद्दों—SIR प्रक्रिया, फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों—पर गिरफ्तारी मांग रहा है, वे सभी आधिकारिक कार्यों की श्रेणी में आते हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जब अदालतें ऐसे मामलों का संज्ञान ही नहीं ले सकतीं, तो पुलिस भी सामान्य रूप से गिरफ्तारी नहीं कर सकती।

गिरफ्तारी की व्यावहारिक सीमाएं

गिरफ्तारी के लिए FIR दर्ज होना, जांच होना और अदालत का आदेश जरूरी होता है। लेकिन धारा 16 के कारण आधिकारिक कार्यों पर आधारित आपराधिक मुकदमा अदालत में नहीं चल सकता। यह सुरक्षा मौजूदा और पूर्व CEC दोनों पर लागू होती है। हालांकि, अगर कोई पूरी तरह निजी अपराध साबित हो जो आधिकारिक ड्यूटी से जुड़ा न हो, तो यह सुरक्षा लागू नहीं होगी। वर्तमान विवाद आधिकारिक निर्णयों पर केंद्रित है।

विपक्ष की मांग और हकीकत

केजरीवाल ने ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार कर राजद्रोह का मुकदमा चलाने और कई राज्यों के चुनाव रद्द करने की मांग की है। ममता बनर्जी ने भी उनकी गिरफ्तारी और आपराधिक कार्रवाई की बात कही है। कुछ दलों ने महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने की भी मांग की है। लेकिन संसद में महाभियोग प्रस्ताव पास कराना सत्ता पक्ष के बहुमत के कारण बेहद कठिन है।

चुनाव आयोग ने इस बीच अपनी स्थिति दोहराई है कि सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुरक्षा चुनाव आयोग की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए संविधान और कानून में रखी गई है, ताकि राजनीतिक दबाव में कोई भी CEC आसानी से निशाना न बन सके।

फिलहाल, विपक्ष की गिरफ्तारी की मांग राजनीतिक है, जबकि कानूनी रास्ता संसदीय प्रक्रिया और अदालती चुनौती से होकर गुजरता है। धारा 16 की वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी विचाराधीन है, लेकिन वर्तमान में यह प्रावधान लागू है।

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