चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण: मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्तों के मतभेद पर ईसीआई का बयान, सभी फैसले सर्वसम्मति से लेने का दावा
चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण: मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्तों के मतभेद पर ईसीआई का बयान, सभी फैसले सर्वसम्मति से लेने का दावा
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की खबरों और विपक्षी दलों के हंगामे के बाद चुनाव आयोग (ECI) की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। आयोग ने एक पत्र जारी कर स्पष्ट किया है कि ईसीआई एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था है, जो संविधान के अनुच्छेद 324 और स्थापित कानूनी परंपराओं के तहत काम करती है।
चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण के मुख्य बिंदु
वैधानिक प्रक्रिया का पालन: आयोग ने कहा है कि ईसीआई के सभी कार्य कानूनों और निर्देशों के अनुरूप हैं। सभी आधिकारिक आदेश और प्रशासनिक निर्णय ‘मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023’ के तहत स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन करते हैं।
आंतरिक चर्चा और टिप्पणियां सामान्य: आयोग के अनुसार, निर्णय लेने की प्रक्रिया के दौरान ड्राफ्टिंग चरणों में सदस्यों द्वारा सवाल उठाना, तकनीकी सुझाव देना या अलग-अलग राय होना एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है। यह सब मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है।
सभी फैसले सर्वसम्मति से: आयोग ने स्पष्ट किया कि पिछले 10 महीनों में मतदाता सूची संशोधन (SIR) सहित सभी बड़े निर्णय और लगभग 40 नई पहलें पूरे आयोग के सर्वसम्मत निर्णयों का परिणाम हैं। केवल कुछ आंतरिक नोटों या टिप्पणियों को हाइलाइट करना स्थिति का आंशिक पहलू दिखाता है।
डिजिटल सुरक्षा और कार्यप्रणाली: ECINet जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म कड़े डेटा सुरक्षा नियमों और साइबर-सुरक्षा उपायों के तहत काम करते हैं। साथ ही, इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) और जिला चुनाव अधिकारी कानून के दायरे में रहकर अपनी शक्तियों का उपयोग करते हैं।
आयोग ने दोहराया है कि वह लोकतंत्र को मजबूत करने और अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पूरी ईमानदारी से पालन करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
